बसों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर होने वाली किचकिच को कम करने के लिए डीटीसी काबिलेगौर पहल करने जा रही है। रिजर्व सीटों की संख्या बढ़ाने के बाद अब उन्हें गुलाबी रंग में रंगने की योजना पर शिद्दत से विचार किया जा रहा है।
बस में इन सीटों की पहचान बिल्कुल अलग हो जाएगी। इन सीटों पर बैठे पुरुषों को यह रंग याद दिलाता रहेगा कि किसी महिला के आने पर उन्हें इसे छोड़ना होगा। दरअसल महिलाओं की शिकायत रहती है कि उनके लिए सार्वजनिक परिवहन में सीट तो आरक्षित कर दी, लेकिन उन्हें लाभ नहीं मिलता है।
हेल्पलाइन पर शिकायत में लिखा गया है कि पुरुष यात्री आरक्षित सीट से उठते ही नहीं हैं। यदि उन्हें उठने को कहा जाता है तो वे ऊपर की तरफ इशारा करते हैं कि कहां लिखा है यह सीट महिलाओं की है। इससे अक्सर महिला और पुरुष यात्रियों में नोकझोंक होती है क्योंकि महिला आरक्षित सीट को दर्शाने वाले स्टीकर हटा दिए जाते हैं।
बदतमीजी की हद तो तब हो जाती है जब महिलाएं पुरुषों को स्टीकर की ओर दिखाते हुए सीट खाली करने को कहती हैं तो वो कह देते हैं कि जहां ‘महिलाएं’ लिखा है वहीं बैठ जाओ।
इन्हीं शिकायतों और सुझावों को देखते हुए डीटीसी प्रबंधन बसों में स्टीकर के साथ सीटों को गुलाबी रंग देने की योजना बना रहा है। योजना के तहत परिचालक या जिस साइड से यात्री बस में चढ़ते हैं, उस ओर की सभी दस सीटों को गुलाबी किया जाएगा। इन गुलाबी सीटों पर ‘सिर्फ महिलाएं’ भी लिखा होगा।
10 से 12 सीट महिलाओं के लिए
एक मार्च से डीटीसी और नारंगी बसों में महिलाओं की आरक्षित सीटों की संख्या में इजाफा हो गया है। लो फ्लोर बसों में पहले जहां छह सीट होती थीं, अब उसके स्थान पर दस और स्टैंडर्ड लो फ्लोर में 12 सीटों पर महिलाओं का अधिकार होगा।
महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा का अहसास दिलाने के लिए सुझावों का स्वागत है। महिलाएं डीटीसी हेल्प लाइन या ईमेल से सुझाव भेज सकती हैं। आरक्षित सीटों को दर्शाने वाले स्टीकर अन्य यात्री हटा देते हैं। महिला यात्रियों के सुझाव पर ही स्टीकर की बजाय महिलाओं की सीटों को गुलाबी रंग दिया जाएगा।-- रमाकांत गोस्वामी, परिवहन मंत्री