उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) बीके शुक्ला को मंगलवार को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए उन्हीं के दफ्तर में रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। यह रकम पांच लाख में से पेशगी के रूप में एक पेट्रोल पंप का नया लाइसेंस बनाने के लिए थी, जिसे लेकर पंप का मैनेजर पहुंचा था।
पुलिस की एंटी करप्शन की टीम ने गिरफ्तार करने के बाद सदर बाजार थाने में मुकदमा भी दर्ज करा दिया है। यह डीएसओ शुक्ला वही हैं, जिन्हें प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा ने एक मामले में पहले भ्रष्ट बताया था और एक महीने बाद ही ईमानदार बताते हुए जनहित में शाहजहांपुर में बने रहने देने की संस्तुति की थी।
शुक्ला तीन साल पहले पूर्ति निरीक्षक पद पर रहते हुए गाजियाबाद में भी रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे। एंटी करप्शन टीम की अगुआई कर रही मुरादाबाद की डीएसपी प्रज्ञा मिश्रा ने बताया कि जैतीपुर थाना क्षेत्र के गांव अगरौली में प्रकाश पेट्रोल पंप के मालिक प्रकाश चंद की ओर से शुक्ला के बारे में शिकायत की गई थी।
नमस्ते किया और फिर रकम पकड़ा दी
पेट्रोल पंप के लाइसेंस की समय सीमा खत्म हो गई थी और उसके रिनुअल के लिए पहले पांच लाख रुपये बीके शुक्ला ने मांगे। बात नहीं बनी तो बाद में फिर नया लाइसेंस बनाकर काम शुरू करने की बात हुई। उसके लिए भी पांच लाख रुपये की मांग शुक्ला ने रख दी एवं उसकी प्रक्रिया शुरू करने के लिए पहले 50 हजार रुपये मांगे थे।
शिकायत पर कार्रवाई करने के लिए शासन से अनुमति ली गई। इसके बाद मंगलवार को बरेली विंग के चार इंस्पेक्टरों के साथ डीएसपी शाहजहांपुर पहुंच गईं। तय हुआ कि रकम लेकर प्रबंधक भानु प्रताप सिंह जाएंगे।
सबसे पहले टीम ने भानु प्रताप से डीएसओ शुक्ला की बात कराकर पेशगी लेने के लिए स्थान और समय तय कराया। एक-एक हजार रुपये के नोटों पर पाउडर लगाकर भानु को कलक्ट्रेट के पीछे स्थित शुक्ला के दफ्तर भेजा गया। दोपहर करीब तीन बजे पहुंचे भानु प्रताप ने सबसे पहले शुक्ला को नमस्ते की और फिर रकम पकड़ा दी।
रकम हाथ में लिए जाने की बात पता चलते ही टीम ने दफ्तर में घुसकर डीएसओ को दबोच लिया। पानी से हाथ धुलवाए और नोटों को भी धुलवाया तो दोनों के रंग समान आए। जब्त नोटों पर वही नंबर मिले, जो गड्डी बनाते वक्त टीम ने दर्ज किए थे। फिर डीएसओ को हिरासत में लेकर टीम सदर बाजार कोतवाली पहुंची। वहां पूछताछ कर शाम को 13 करप्शन एक्ट में केस दर्ज कर लिया गया। बुधवार सुबह उन्हें बरेली में भ्रष्टाचार निवारण संबंधी कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पूर्व डीएम ने भी हटवाया था
बीके शुक्ला को शाहजहांपुर में 22 जून 2013 को तैनाती मिली थी, कुछ समय बाद ही तत्कालीन डीएम राजमणि यादव ने भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट पर शुक्ला को 19 अगस्त 2013 को यहां से हटाते हुए शासन ने मुख्यालय से अटैच कर लिया था। ऐसे में वह लंबी छुट्टी चले गए थे।
बाद में वह स्टे ले आए और 15 अक्तूबर 2013 को दोबारा ज्वाइन कर लिया था। इस बीच ही राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा ने उनके खिलाफ एक मामले में शिकायत मिलने पर खाद्य एवं रसद मंत्री को 10 जुलाई 2013 को पत्र लिखकर भ्रष्ट अधिकारी करार देते हुए जांच की संस्तुति सहित तबादला करने का आग्रह किया था।
इसके करीब एक महीना बाद ही राज्यमंत्री ने 15 अगस्त 2013 को फिर से खाद्य एवं रसद मंत्री को पत्र लिखकर शुक्ला को ईमानदार बताया था और जनहित में उन्हें जिले में रहने देने की सिफारिश की थी। इसके बावजूद उन्हें हटा दिया गया था। यह बात पत्रकार जगेंद्र ने पूरी कहानी के साथ फेसबुक पोस्ट में डाली थी जिसमें डीएसओ पर लगे तमाम आरोपों का जिक्र था।
बीके शुक्ला, डीएसओ ने बताया कि मुझे साजिश के तहत फंसाया गया। कुछ माह पहले इस पंप पर कई खामियां और कमियां मिली थीं तो लाइसेंस निरस्त कराया था। मेरे खिलाफ तभी से साजिश रची जानी शुरू हुई।