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करीब 14 डॉलर की दवा का दाम एक रात में बढ़कर हो गया 750 डॉलर

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आपको सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन ऐसा हुआ है कि करीब 14 डॉलर की टेबलेट की कीमत एक रात में 750 डॉलर पर पहुंच गई।
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गंभीर संक्रामक बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ये टेबलेट पिछले 62 साल से बिक रही है। लेकिन अचानक ही कुछ ऐसा हुआ कि इसकी कीमत कई गुना तक बढ़ गई। इसका खामियाजा इससे जुड़े लोगों को उठाना पड़ रहा है।

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक कल तक जिस टेबलेट को वो कम पैसे में आसानी से खरीद लेते थे एक रात में उसकी कीमत में अच्छा-खासा इजाफा हो गया।

इस दवा का नाम है, डाराप्रिम, जिसका अगस्त में ट्यूरिंग फार्मास्यूटिकल्स ने हेज फंड मैनेजर से अधिग्रहण किया। ट्यूरिंग कंपनी ने अधिग्रहण के तुरंत बाद ही दाम दवा का दाम 13.50 डॉलर से बढ़ा कर 750 डॉलर कर दिया। यानि कल तक जिस दवा का सैकड़े में था वह अब हजार में पहुंच गया।
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(फोटो साभार: न्यूयॉर्क टाइम्स)

जानकारों ने इस पर उठाए सवाल

दवा के दाम में किए गए इस इजाफे पर ईकान स्कूल ऑफ मेडिसिन (माउंड सिनाई) के संक्रामक बीमारी विभाग के अध्यक्ष डॉ. ज्यूडिथ अबर्ग ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर उन्होंने दवा में ऐसा क्या बदलाव किया जो नाटकीय तरीके से इसके दाम बढ़ा दिए गए।

उन्होंने आगे कहा कि इस कवायद के बाद अब अस्पताल इस दवा से इतर किसी और इलाज की कवायद में जुटेंगे। हालांकि ये उतना प्रभावी होगा ये देखने की बात होगी।

केवल ट्यूरिंग के दाम में किया गया इजाफा अकेला उदाहरण नहीं है। कई मामले ऐसे हैं जिनमें दवा के दामों में अच्छा-खासा इजाफा किया गया है। कैंसर, हेपेटाइटिस सी और हाई कोलेस्ट्रॉल कुछ ऐसी बीमारियां हैं जिनकी नई दवाएं भी काफी महंगी हो गई हैं। इसके पीछे कई वजहों के बीच एक कारण कंपनियों की व्यापारिक रणनीति भी है। वहीं कई बार इन दवाओं के दामों में इजाफे की वजह इसकी बढ़ती मांग भी निर्भर करता है।
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पहले भी बढ़े हैं कई दवाओं के दाम

टीबी की बीमारी में साईक्लोसीरिन नाम की दवा है जो खास तौर इस्तेमाल होती है, इसके दाम में भी इजाफा हुआ। ये बढ़ोतरी उस वक्त हुई जब रोडेलिस थेरेप्यूटिक्स ने इसका अधिग्रहण किया। बदलाव के बाद 30 टेबलेट के

लिए 500 डॉलर से बढ़ाकर इसका दाम 10,800 डॉलर कर दिया गया।

इस मामले में रोडेलिस के जनरल मैनेजर स्कॉट स्पेंसर ने बताया कि कंपनी को दवा की मांग की आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी था। इसके लिए कंपनी ने दाम बढ़ाए क्योंकि कंपनी कई जरूरतमंदों को नि:शुल्क भी दवा मुहैया कराती थी।

ऐसा ही एक मामला अगस्त में आया जब जेनरिक दवा के दामों की जांच करने वाली कांग्रेस के दो सदस्यों ने वैलियंट फार्मास्यूटिकल्स को पत्र लिखा, जब कंपनी ने माराथन फार्मास्यूटिकल्स की दो हृदय से जुड़ी दवाओं इसूप्रेल और नाइट्रोप्रेस का अधिग्रहण किया और इसके दाम में क्रमश: 525 फीसदी और 212 फीसदी का इजाफा किया गया। माराथन ने दूसरी कंपनी से 2013 में इन दवाओं का अधिग्रहण किया था।
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