पूर्व डिप्टी सीएमओ डॉ. योगेन्द्र सिंह सचान की जेल में हुई रहस्यमय परिस्थितियों में मौत को आत्महत्या बताने वाली सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर शनिवार को कोर्ट में उनकी पत्नी डॉ. मालती सचान की ओर से आपत्ति दाखिल की गई।
आपत्ति में सीबीआई की पड़ताल व उसके नतीजे पर अंगुली उठाते हुए कहा गया है कि क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए मामले की फिर से पड़ताल करवाई जाए। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट नीलकांतमणि त्रिपाठी ने सीबीआई से इस संबंध में 15 दिसंबर को जवाब-तलब किया है।
डॉ. मालती सचान की ओर से अधिवक्ता वीके शाही ने कोर्ट में 10 पन्नों की आपत्ति दाखिल की। आपत्ति में कहा गया है कि सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट में बताया था कि डॉ. सचान जेल में अवसाद में थे। इसके चलते उन्होंने आत्महत्या कर ली थी। आपत्ति अर्जी में कहा गया है कि जेल के डॉ. राजेश अग्रवाल व डॉ. योगेश कुमार ने अपने बयान में 10 जून से घटना वाले दिन तक कभी भी डॉ. सचान के अवसाद में होने की बात नहीं की है और न ही उन्होंने डॉ. सचान को अवसाद की कोई दवा दी थी।
आपत्ति में आत्महत्या करने में कथित रूप से प्रयुक्त सर्जिकल चाकू के विषय में कहा गया कि जिस चाकू से डॉ. सचान के द्वारा अपने शरीर पर चोट करने की बात कही गई है, इस चाकू का न तो फर्द बनाया गया है और न ही फोरेंसिक जांच की गई। क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया कि घटनास्थल से डॉ. सचान के पास से किसी प्रकार का कोई औजार नहीं मिला है। सीबीआई ने डॉ. सचान का सुसाइट नोट भी बरामद नहीं और न ही इस संबंध में जेल महानिरीक्षक वीके गुप्ता से गहन व विश्वसनीय पूछताछ ही की।
कोर्ट ने आपत्ति पर सीबीआई को अपना जवाब दाखिल करने तथा मामले की सुनवाई के लिए 15 दिसंबर की तारीख तय की है। आपत्ति में सीजेएम राजेश उपाध्याय की जांच का भी जिक्र किया गया है जिसमें डॉ. सचान की मौत को हत्या करार दिया गया था। इसी अदालत ने पूर्व सीएमओ डॉ. बीपी सिंह व डॉ. विनोद कुमार आर्य हत्याकांड मामले पर विचार को दस्तावेज सत्र न्यायालय को सुपुर्द करने के लिए 29 नवम्बर की तारीख तय की है। कोर्ट ने इस तारीख पर सभी आरोपियों को अदालत के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया है।