भारतीय तटरक्षक बल के उन दावों पर सवाल उठने लगा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 31 दिसंबर की रात विस्फोटक सामग्री से लदी पाकिस्तानी नाव भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर रही थी। तटरक्षक बलों ने नाव को घेर लिया। खुद को घिरा देख नाव में बैठे आतंकियों ने विस्फोटक सामग्रियों में आग लगा दी और भीषण विस्फोट के बाद नाव समुद्र में डूब गई।
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वारदात के 48 घंटों बाद ही कहा जा रहा है कि नाव आतंकियों के बजाय स्मगलरों की रही होगी। ऐसे सबूत सामने आ रहे हैं, जिनसे लग रहा है कि मानो नाव में सवार लोग शराब और डीजल के स्मगलर थे।
नाव पर शराब लदी हुई थी और उसे बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से लाया जा रहा था। उस नाव से शराब को दूसरी नावों को दिया जाना था और वे उसे कराची के केटी बंदरगाह तक ले जातीं।
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हमले की नहीं थी कोई खुफिया जानकारी
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था कि 31 दिसंबर की रात कराची के केटी बंदरगाह से आ रही एक नाव से अरब सागर में अवैध लेनदेन किया जाना है, ऐसी खुफिया जानकारी प्राप्त हुई है।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना था कि खुफिया सूचनाओं में आतंकी कार्रवाइयों का संकेत नहीं था। उन सूचनाओं में भारत में किसी आतंकी हमले के संकेत भी नहीं थे।
सूत्रों का कहना है कि नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (NTRO) को मोबाइल फोन पर स्मगलरों के बीच हुई बातों की जानकारी मिली थी। ये स्मगलर कराची के केटी बंदरगाह के आसपास सक्रिय थे।
NTRO ने दी कोस्ट गार्ड और नेवी को सूचना
ये रिपोर्ट एनटीआरओ के अधिकारियों ने सीधे नेवी और कोस्ट गार्ड को दे दी। जबकि नियमों के मुताबिक ऐसी कोई भी जानकारी पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो, रॉ, बीएसएफ, रक्षा मंत्रालय जैसे कई संस्थानों को बतानी होती है।
सूत्रों के मुताबिक, नेवी हेडक्वार्टर ने खुफिया जानकारी के बाद भी अपने जहाजों को तैनात नहीं किया। नेवी का मानना था कि सूचना में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे जैसे कोई जानकारी नहीं है, इसलिए ऐसी कोई जरूरत नहीं है।
हालांकि तटरक्षक बलों ने सक्रियता दिखाई। तटरक्षकों बलों ने ही उस नाव का पीछा किया, जिसमें विस्पोटक और आतंकी होने की बात कही जा रही है।
गुजरात और महाराष्ट्र पुलिस को भी नहीं थी जानकारी
हालांकि समुद्र में संदिग्ध नाव देखे जाने के सूचना तटरक्षक बलों ने गुजरात पुलिस के तटीय थानों को भी नहीं दी। महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारियों को भी जानकारी नहीं दी गई।
महाराष्ट्र पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र की तटीय सीमा पर कई ऐसी जगहें जहां से नावें राज्य में प्रवेश कर सकती हैं, लेकिन हमे उस समय नहीं बताया गया कि किसी नाव का पीछा किया जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति में कहा गया कि संदिग्ध नाव का एक घंटे पीछा किया गया।
नेवी के अधिकारियों का कहना है कि ये समझ से पर है कि एक ऐसी नाव जिसकी लंबाई 25 मीटर से भी कम थी, और उसमें 80-220 हॉर्सपॉवर का डीजल इंजन लगा था, वह कोस्ट गार्ड के जहाजों को एक घंटे तक छकाने में कामयाब रही। उन्होंने कहा कि कोस्ट गार्ड के पास उच्च तकनीकी की जहाजें हैं और वों ऐसी नावों को आसानी से पकड़ सकती हैं।
रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया था कि खुफिया एजेंसियों को 31 दिसंबर को कराची बंदरगाह के पास स्थित केटी बंदर से चली इस संदिग्ध नाव की जानकारी मिली थी।
इस आधार पर तटरक्षक बल के डॉर्नियर टोही विमान ने उस संदिग्ध नाव को समुद्र में ढूंढना शुरू किया। साथ ही पेट्रोलिंग कर रहे तटरक्षक बल के पोतों को भी अलर्ट कर दिया गया।
आधी रात के बाद पोरबंदर से करीब 365 किलोमीटर दूर वह नाव देखी गई। भारतीय तटरक्षक बल ने इस नाव का पीछा किया, लेकिन तमाम चेतावनी को नजरअंदाज कर वह नाव पाकिस्तान की तरफ भागने लगी।
पीछा करने के बाद आखिरकार तटरक्षक बल के जवानों ने उसे घेर लिया। मगर आत्मसमर्पण करने की बजाय नाव में सवार चारों लोग डेक में जा छिपे और नाव को आग लगा दी। थोड़ी ही देर में नाव में भीषण विस्फोट हो गया और नाव डूब गई।
रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने तटरक्षक बल की प्रशंसा की थी।