हमारे-आपके गोल्ड खरीदने से देश के वित्त मंत्री दुखी हैं। वह बार-बार आग्रह कर रहे हैं कि आप सोना मत खरीदिए। गुरुवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने एक बार फिर जनता से सोना न खरीदने की अपील की।
वह एक संवाददाता सम्मेलन में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का ब्योरा दे रहे थे। इसमें उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक सुधार वनडे मैच नहीं है, इसलिए संयम बरतना होगा।
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उन्होंने कहा, 'अगर हम छह महीने या साल भर तक देश में कम से कम सोना आयात करेंगे, तो इससे चालू खाता घाटा (सीएडी) की स्थिति में नाटकीय बदलाव आएगा। इससे इकनॉमी, स्टॉक मार्केट, एक्सचेंज रेट और ब्याज दरों पर सकारात्मक असर होगा।'
जानकार भी इस बात से इत्तफाक रखते हैं कि गोल्ड इम्पोर्ट पर नकेल कसकर ही सीएडी कम किया जा सकता है। अमर उजाला के बिजनेस एडिटर हरवीर सिंह का कहना है कि सरकार सोने के इम्पोर्ट में कमी लाना चाहती है, जिसके दो कारण हैं।
कोई वनडे मैच नहीं हैं देश्ा मे आर्थिक सुधार
पहला, सोना एक अनप्रोडक्टिव एसेट है और इसमें जाना वाला निवेश बेकार पड़ा रहता है। दूसरा, इसके कारण चालू खाता घाटा लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, 'हम जितना एक्सपोर्ट करते हैं, उससे कहीं ज्यादा इम्पोर्ट कर रहे हैं और इसका बड़ा कारण सोने का आयात है।'
क्या सरकार को सीएडी को काबू करने के लिए आयात घटाने के बजाय निर्यात बढ़ाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए, इस पर सिंह ने कहा, 'एक्सपोर्ट अपने हाथ में नहीं है। यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों में ग्रोथ सुस्त है, इसलिए एक्सपोर्ट में रफ्तार की उम्मीद कम है।'
चिदंबरम की बात का असर भी हो रहा है। उन्होंने कहा, 'मैं खुश हूं कि देश के लोग मेरी अपील पर गौर कर रहे हैं। इसलिए गोल्ड इम्पोर्ट में काफी कमी आई है, लेकिन अगर यह और कम होगा तो मेरी खुशी और बढ़ेगी।'