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अब गधे भी करेंगे कैटवॉक, मजाक नहीं सच है ये!

Thu, 02 Oct 2014 09:54 AM IST
पीयूष पांडेय/नई दिल्ली
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अब गधे भी कैटवॉक करेंगे। यह कोई मजाक नहीं, बल्कि राजस्थान में शुरू हुए गधों के मेले का वह सच है, जिसे सुनकर शायद ही कोई आश्चर्य में नहीं पड़े। मगर विविधताओं के इस देश में यह मेला कई सौ साल से लगता आ रहा है जहां लद्दाख से लेकर यूपी तक के गधे एकत्र होते हैं।
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इस बार मेले को आकर्षक बनाने के लिए गधों को रैंप की जगह सजी-धजी जमीं पर कैटवॉक कराने के इंतजाम किए गए हैं। बुधवार से शुरू हुआ यह मेला दशहरे तक चलेगा।

जयपुर के थोड़ी दूरी पर लुनियावास में लगने वाला यह मेला खलकारी माता के नाम से प्रसिद्ध है। यहां पचास हजार गधों व बड़ी संख्या में उनसे मिलते-जुलते जानवर तीन दिन के मेले में पड़ोसी राज्यों और पूरे राजस्थान से लाए जाते हैं।
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कई सौ साल से आयोजित हो रहा मेला

मेले के आयोजनों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले पूर्व विधायक कन्हैया लाल मीणा के मुताबिक मेले की जिम्मेदारी नगर निगम के हाथों में लिए जाने के बाद यूपी, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों से आने वाले गधों की संख्या कम हो गई है क्योंकि उनके इस मेले में लाए जाने पर टैक्स लगा दिया गया। इसके बावजूद आंकड़ा हर साल करीब पचास हजार तक पहुंच जाता है।

उन्होंने बताया कि यह मेला पूरे उत्तर भारत में गधों की खरीद-फरोख्त के लिए कई सौ साल से आयोजित होता आ रहा है। हर साल इसे आकर्षक बनाने के लिए कुछ न कुछ नया किया जाता है। इस साल कैटवॉक का विशेष आयोजन किया जा रहा है। पूर्व विधायक के मुताबिक गधों को कैटवॉक के लिए विशेष तौर पर तैयार किया जा रहा है। उन्हें विभिन्न रंगों से रंगा जाता है। घुंगरू, घंटियां और झूल (कपड़े) पहनाएं जाते हैं।

खास बात यह है कि इसमें वही गधे हिस्सा लेंगे, जिनके नाम फिल्मी सितारों के नाम पर हैं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की तैयारियां मेले में जोर पर हैं, जो गधों और घोड़ों की दौड़ के अलावा अन्य खेलों व कार्यक्रमों के बाद आयोजित किया जाएगा ताकि लोगों का आकर्षण मेले के प्रति बना रहे।
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