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भ्रष्टाचार न रुके तो टैक्स देना बंद कर दे जनता: बांबे हाईकोर्ट

Wed, 03 Feb 2016 08:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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केंद्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार आने के बाद एनडीए के नेता भ्रष्टाचार पर लगाम लगने का दावा करते हैं लेकिन बांबे हाईकोर्ट ने इसकी हवा निकाल दी है।
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बांबे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने भ्रष्टाचार के बढ़ते मामलों में कड़ी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने लोगों से कहा है कि अगर सरकार भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में नाकाम होती है तो असहयोग आंदोलन करें और टैक्स देने से इनकार कर दें। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस अरुण चौधरी ने गबन के एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि लोग एकजुट हों और भ्रष्टाचार रूपी भयानक राक्षस के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें।

कोर्ट ने कहा कि जनता अपनी सरकारों से कहें कि अब बहुत हो चुका भ्रष्टाचारा। अगर सभी लोग एकजुट होकर काम करें तो भ्रष्टाचार के माहौल को खत्म किया जा सकता है।
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जनता की करदायी पीड़ा को समझे सरकार

कोर्ट ने कहा कि सरकार को जनता की करदायी पीड़ा को समझनी चाहिए। महाराष्ट्र के करदाता बीते दो दशक से भ्रष्टाचार से जूझ रहे हैं क्योंकि सरकार की ओर से संचालित वित्तीय संस्थानों में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा कि अगर भ्रष्टाचार ऐसे ही जारी रहता है तो लोगों को टैक्स देने से इनकार कर देना चाहिए। हाईकोर्ट के जज ने मतंग समाज के लिए गठित अन्नाभाऊ साठे विकास महामंडल में भ्रष्टाचार से ही जुडे़ मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

इस महामंडल में 385 करोड़ रुपए के फंड के दुरुपयोग और गबन का मामला सुर्खियों में रहा है। इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अरुण चौधरी ने कहा कि यदि सभी मिलजुलकर काम करेंगे तो भ्रष्टाचार के वातावरण को खत्म किया जा सकता है।
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फ्लिपकार्ट की तर्ज पर वेबसाइट बनाकर दूर करें भ्रष्टाचार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी विभागों द्वारा की जानें वाली खरीददारी में व्याप्त भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए वाणिज्य मंत्रालय से कडे़ कदम उठाने को कहा है। इस सिलसिले में सरकारी विभागों के लिए वस्तुओं की खरीद करने वाली पूर्ति तथा निपटान महानिदेशालय (डीजीएसएंडडी) को फ्लिपकार्ट की तर्ज पर वेब प्लेटफॉर्म विकसित करने को कहा गया है।

इसके अलावा सरकारी खरीद के लिए नियमों को उदार बनाने की बात की गई है ताकि मंत्रालय या विभाग अपनी जरूरत की वस्तुएं बाजार से सस्ते दाम पर खरीद सकें। बताया जा रहा है कि डीजीएसएंडडी में फ्लिपकार्ट की तर्ज पर ई-प्लेटफॉर्म बनाने की कवायद शुरू हो चुकी है लेकिन पीएमओ के इस निर्देश को लेकर डीजीएसएंडडी के कुछ अधिकारियों में बेचैनी है। दूसरी तरफ, कई लोग इस प्रयास की सराहना भी कर रहे हैं।

दरअसल प्रधानमंत्री कार्यालय का जोर सरकारी खरीद के नियमों को उदार बनाकर आपूर्ति प्रक्रिया को लालफीताशाही से मुक्त कराने पर है। सरकार की कोशिश सरकारी खरीद के नियमों को उदार बनाकर सरकारी खरीद के लिए डीजीएसएंडडी की अनिवार्यता को धीरे-धीरे खत्म करने की है।

फ्लिपकार्ट की तर्ज पर वेब प्लेटफार्म बनने के बाद ई-कॉमर्स की कंपनियों से टक्कर लेने के लिए उन्हें कॉरपोरेट संस्कृति की तरह कामकाज करना पड़ेगा। जबकि सरकारी खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए पीएमओ की इस पहल को कई अधिकारी भ्रष्टाचार खत्म करने की कड़ी में बड़ा कदम मान रहे हैं।
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