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खुलासा:मोदी जानते हैं भाजपा का यह 'भेद'?

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नरेंद्र मोदी की अगुआई में भाजपा लोकसभा चुनावों में कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दे रही है, लेकिन 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा ने अपनी पहली केंद्र सरकार बचाने के लिए नरसिंह राव से मदद मांगी थी।
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लेकिन राव ने यह कहकर नामंजूर कर दिया था कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें विधायक से मंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और प्रधानमंत्री तक बनाया, अब अपने स्वार्थ के लिए वह अपनी पार्टी और उसके सिद्धांतों के साथ विश्वासघात नहीं कर सकते।

यह दावा नरसिंह राव के सलाहकार रहे पं. एन.के.शर्मा ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में किया। शर्मा जो राव के बेहद करीबी रहे हैं, का दावा है कि वाजपेयी की 12 दिन तक चली उस सरकार को बचाने के लिए सबसे पहले उस सरकार में वित्त मंत्री और वाजपेयी के बेहद भरोसेमंद जसवंत सिंह उनसे फोन करके संपर्क साधा था।
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'राव जी, अटल सरकार बचा लो'

शर्मा के मुताबिक जसवंत सिंह ने उनसे कहा कि वाजपेयी चाहते हैं कि उनकी सरकार बनाए रखने में नरसिंह राव मदद करें। तब शर्मा ने सिंह से कहा कि राव से बात करने से पहले वह इस पर अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे में से किसी से बात करना चाहेंगे।

इसके अगले दिन जसवंत सिंह ने फिर शर्मा को फोन करके कहा कि शाम चार बजे प्रधानमंत्री के यहां वाजपेयी, आडवाणी और ठाकरे के साथ उनकी बैठक तय हो गई है। लेकिन शर्मा ने इस मुद्दे पर अपने एक मित्र, जो एक प्रमुख अखबार के संपादक भी हैं, से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि जब तक कोई ठोस बात न हो जाना ठीक नहीं होगा क्योंकि इससे बिना मतलब अफवाहों को बल मिलेगा।

शर्मा कहते हैं कि वह बैठक में नहीं गए और मामले को टालने के लिए वह एस एम कृष्णा की बेटी की शादी में शामिल होने सपरिवार तय कार्यक्रम से तीन दिन पहले ही बेंगलूरु चले गए।

भाजपा के संकट मोचक पड़े पीछे

शर्मा बताते हैं कि तब भाजपा के एक वरिष्ठ नेता जो पार्टी के प्रमुख सियासी प्रबंधक और संकट मोचक माने जाते थे, क्योंकि वह अब इस दुनिया में नहीं हैं इसलिए उनका नाम लेना मुनासिब नहीं है, उनसे मिलने बेंगलूर आए और शादी के समारोह में पहुंच गए।

लेकिन उनसे बातचीत से बचने के लिए शर्मा वर वधू के पास मंडप में जाकर बैठ गए। तब वह भाजपा नेता शर्मा से मिलने रात साढ़े 11 बजे होटल के कमरे पर गए जहां शर्मा सपरिवार रुके थे। लेकिन शर्मा ने थके होने की बात कहकर टाल दिया।

उक्त भाजपा नेता अगले दिन सुबह फिर शर्मा के कमरे पर पहुंचे और बात शुरू की। तब शर्मा ने उनसे कहा कि एक तरफ भाजपा वाजपेयी सरकार बचाने के लिए भाजपा नरसिंह राव की मदद चाहती है, जबकि उसी सरकार के कानून मंत्री राम जेठमलानी यह बयान दे रहे हैं कि नरसिंह राव के लिए तिहाड़ जेल में कमरा तैयार कर दिया गया है। ऐसे में कोई बात कैसे हो सकती है।

राव को क्लीन चीट देने की पेशकश

शर्मा ने बताया कि इसके बाद उक्त भाजपा नेता चले गए और फिर 11 बजे पीटीआई के एक टेलेक्स के साथ लौटे जिसमें जेठमलानी के इस्तीफे की पेशकश की खबर थी। फिर दोनों के बीच बातचीत हुई।

इसमें भाजपा की ओर से प्रस्ताव था कि राव अगर वाजपेयी सरकार बचाने में मदद करते हैं तो बदले में उनके खिलाफ तीनों अपराधिक मामलों झामुमो रिश्वत कांड, सेंट कीट्स मामला और लक्खू भाई पाठक मुकदमे में राव को क्लीन चिट दी जाएगी।

इस समझौते को अमल में लाने के एवज में शर्मा को प्रधानमंत्री कार्यालय में उसी अहमियत के साथ नियुक्त किया जाएगा जैसा महत्व उन्हें राव के जमाने में प्रधानमंत्री कार्यालय में मिला था।
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राव ने किया मदद से इंकार

शर्मा के मुताबिक यह चारा भी डाला गया कि अगर राव के इस कदम से कांग्रेस में विभाजन होता है तो राव समर्थक सांसदों को सरकार में शामिल करके जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में राव उम्मीदवार बनाकर राष्ट्रपति भवन भी भेजा जा सकता है।

शर्मा के मुताबिक उन्होंने बेंगलूर से ही राव से फोन पर यह सारी बात बताई। राव ने उन्हें दिल्ली आकर बात करने को कहा। भाजपा नेता ने शर्मा को विशेष विमान से दिल्ली ले चलने को कहा। लेकिन शर्मा अपने तय कार्यक्रम के हिसाब से यात्री विमान से ही दिल्ली लौटे। दिल्ली में उन्होंने राव से मिलकर उन्हें सारी बात बताई।

तब राव ने शर्मा से कहा कि जिस कांग्रेस पार्टी ने उन्हें विधायक से मंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और प्रधानमंत्री बनाया, मैं उसके साथ अपने स्वार्थों के लिए कुठाराघात नहीं कर सकता। शर्मा कहते हैं कि राव का यह कथन सुनकर मैं उनके प्रति नतमस्तक हो गया और मैने भाजपा नेताओं को राव के इनकार से अवगत कराकर बात वहीं खत्म कर दी।
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