वित्त मंत्री अरुण जेटली की राज्यसभा के संदर्भ में की गई टिप्पणी लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी को बेहद नागवार गुजरी है। चटर्जी ने जेटली को राज्यसभा को शोपीस न समझने की नसीहत देते हुए कहा कि सरकार उच्च सदन में अपने हर उद्देश्य को बलपूर्वक पूरा नहीं कर सकती।
चटर्जी ने इसे निराशा में दिया गया बयान बताते हुए कहा कि सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। उल्लेखनीय है कि राज्यसभा में बहुमत के अभाव में कई बिलों के लटकने पर जेटली ने यह कह कर विवाद खड़ा कर दिया है कि अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित सदन (राज्यसभा) प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित सदन (लोकसभा) के विवेक पर हमेशा सवाल नहीं उठा सकता।