सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर का आवास लंगूर गार्ड की विशेष सुरक्षा के मामले में सबसे वीआईपी है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इस मामले में पीछे हैं।
यह लंगूर गार्ड बंदरों के आतंक की आशंका से तैनात किए गए हैं। खास बात यह है कि आम जनता के लिए महज दो लंगूर गार्ड हैं। जबकि न्यायाधीशों और नेताओं की खिदमत में विशेष तौर पर प्रशिक्षित 38 लंगूर गार्ड तैनात हैं।
सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए सवालों के जवाब में नई दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) ने कहा है कि कृष्णा मेनन मार्ग पर स्थिति मुख्य न्यायाधीश के 5 नंबर बंगले में चार लंगूर गार्ड तैनात हैं जो बंदरों के उत्पात पर नियंत्रण के लिए हैं।
एनडीएमसी ने विजय लक्ष्मी की आरटीआई के जवाब में साफ किया है कि प्रधानमंत्री के आवास 7 रेसकोर्स में दो लंगूर गार्ड हैं। जबकि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, आईके गुजराल, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के घर में एक-एक लंगूर गार्ड तैनात है।
इस तरह कुल 40 लंगूर की बटालियन में दो को छोड़कर अन्य सभी सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के न्यायाधीशों और नेताओं के घरों में तैनात है। हालांकि मुख्य न्यायाधीश और प्रधानमंत्री बंगले को छोड़कर अन्य सभी जगह एक-एक लंगूर गार्ड ही है। इन गार्डों की ड्यूटी सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक उनके बंगले पर रहती है।
एनडीएमसी के जवाब के मुताबिक उसके पास अपने क्षेत्र में बंदरों के आतंक को रोकने के लिए सिर्फ 40 लंगूर ही हैं जो उसके अपने नहीं हैं, बल्कि इन्हें किराए पर लिया जाता है।
इनमें से 38 वीआईपी सुरक्षा में हैं जबकि एक सरोजनी नगर के स्कूल में तैनात है और दूसरा आम जनता के लिए है जिसकी तैनाती जरूरत के मुताबिक की जाती है।
आरटीआई के जवाब में यह जानकारी भी दी गई है कि लंगूर गार्ड कांट्रैक्टर से एनडीएमसी लेकर उनकी तैनाती करती है।
कांट्रैक्टर को इसके बदले हरेक लंगूर गार्ड के कल्याण के लिए मासिक मेहनताना 8450 रुपये दिया जाता है। लेकिन इन सब तैनातियों में नागरिक निकाय जानवरों पर क्रूरता के कानून को नजरअंदाज कर रही है।