खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर सरकार और विपक्षी दलों के बीच जारी गतिरोध शुक्रवार को भी कायम रहा। विपक्ष के साथ सहयोगी दलों के भी एफडीआई के खिलाफ विरोधी स्वर तेज हो गए हैं। इस पर जारी हंगामे के चलते संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही दूसरे दिन भी ठप रही। मुख्य विपक्षी दल भाजपा और वामपंथी पार्टियां एफडीआई पर सरकार की फजीहत करने के लिए वोटिंग के नियम 184 के तहत लोकसभा में बहस की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। जबकि कांग्रेस वोटिंग कराने के लिए सहमत नहीं है।
एफडीआई के अलावा महंगाई और तेलंगाना के मुद्दे पर भाजपा, सपा, वामदल और तृणमूल सहित अन्य कई दल सरकार के खिलाफ विरोध व्यक्त करते देखे गए। जबकि कांग्रेस ने 2जी घोटाले के आकलन को लेकर कैग के पूर्व डीजी आरपी सिंह को आधार बनाते हुए भाजपा के खिलाफ आवाज बुलंद की। दो बार स्थगन के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही को सोमवार तक स्थगित कर दिया।
लोकसभा की कार्यवाही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अपने मंत्रिपरिषद के नए सदस्यों का परिचय कराने से शुरू हुई। लेकिन इस प्रक्रिया के पूरे होते ही सदन में हंगामा शुरू हो गया। भाजपा ने एफडीआई पर नियम 184 के तहत चर्चा कराने की मांग करना शुरू कर दिया। तृणमूल कांग्रेस के सदस्य भी एफडीआई वापस लेने के नारे लगाते हुए अध्यक्ष के आसन तक पहुंच गए। वामदल के सदस्यों ने भी एफडीआई का प्रबल विरोध किया।
वहीं सपा ने महंगाई का मुद्दा उठाकर सरकार का घेराव किया। जबकि बसपा के सदस्य उत्तर प्रदेश में खराब कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। राज्यसभा में भी एफडीआई को लेकर हंगामा जारी रहा। भाजपा जहां एफडीआई पर चर्चा के बाद मतदान कराने की मांग कर रही थी। वहीं वामदल, तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल एफडीआई को लेकर सरकार का विरोध करते रहे। हंगामे के बीच ही राज्यसभा में लोकपाल पर सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट पेश हुई।
अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगी भाजपा
भाजपा ने साफ कर दिया है कि रिटेल में एफडीआई के मुद्दे पर वह नियम 184 के तहत चर्चा कराने की अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगी। राज्यसभा में भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, ‘सोमवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में हमारा पक्ष बिल्कुल साफ रहेगा कि लोकसभा में नियम 184 के तहत ही बहस होनी चाहिए। साथ ही राज्य सभा में नियम 167 के तहत बहस होनी चाहिए।’
हुसैन ने कहा, ‘लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री को पिछले साल 7 दिसंबर, 2011 सत्र की एक कॉपी दी, जिसमें तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने भरोसा जताया था कि सभी हितधारकों से विमर्श किए बिना अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा। भाजपा ने पीएम को बता दिया है कि उन्हें नियम 184 के तहत चर्चा से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।’