पिछले चार महीनों में डीजल के दामों में पांच रुपये से भी अधिक की कमी आ चुकी है, लेकिन डीजल के महंगा होते ही बढ़े यात्री किरायों और महंगाई की टीस झेलने वाली जनता अभी इनमें कमी का इंतजार ही कर रही है।
निजी ऑपरेटर ही नहीं, सार्वजनिक परिवहन निगम भी किराये कम करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। किरायों में कटौती नहीं करने को लेकर अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं। यदि किरायों में कमी आती तो लोगों को महंगाई से भी कुछ राहत मिलती।
इस बारे में अमर उजाला ने कुछ प्रादेशिक राजधानियों में इस बाबत खोजबीन की। डीजल के दाम में गिरावट के बावजूद उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम यात्री किराया घटाने नहीं जा रहा है।
निगम के वित्त नियंत्रक आलोक अग्रवाल के मुताबिक, कर्मियों का वेतन बढ़ने एवं अन्य मद में बढ़े खर्च के चलते जो यात्री किराया बढ़ने वाला था, वह अब नहीं बढ़ेगा। यात्रियों के लिए यह राहत की खबर है। वहीं ट्रांसपोर्टर यूनियन के प्रवक्ता जगदीश गुप्ता कहते हैं कि स्थानीय ट्रांसपोर्टरों ने 5 से 10 फीसदी किराया कम कर दिया है, जबकि अंतरराज्यीय बसों के मालभाड़े को लेकर बातचीत चल रही है।
लोगों को किराया घटने का है इंतजार
पंजाब के परिवहन मंत्री अजीत सिंह कोहाड़ सफाई देते हुए कहते हैं कि सरकार ने आठ अगस्त-2013 को नोटिफिकेशन जारी कर नया फार्मूला बनाया था। इसके मुताबिक डीजल के रेट पर परसेंटेज प्वाइंट बढ़ने या घटने के मुताबिक हर क्वार्टर में किराया 0.40 फीसदी बढ़ाया या घटाया जाएगा।
अब यह फॉर्मूला एक जनवरी, 2015 की स्थिति से लागू होना है। हरियाणा में पंचकूला के उपायुक्त डा. एसएस फुलिया का कहना है कि प्रशासन की ओर से जनवरी में इस बाबत हुई बैठक में छह किलोमीटर तक के सफर के लिए 10 रुपये, 7-10 किलोमीटर के सफर के लिए 15 और 10 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए 20 रुपये चार्ज किए जाने पर सहमति बनी थी। इस पर जल्द ही कोई फैसला हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में यात्री वाहनों का किराया कम होने का सवाल ही नहीं क्योंकि दिसंबर, 2013 में जब डीजल की कीमत 53.78 रुपये हुई थी, तब जम्मू-कश्मीर में ट्रांसपोर्ट ने चालीस फीसदी यात्री किराये में बढ़ोतरी की मांग की थी। लेकिन सरकार ने उस समय 14 फीसदी किराया ही बढ़ाया था।
हिमाचल में तीन ट्रक यूनियनों ने कम किया किराया
डीजल और पेट्रोल के दाम कम होने के बाद हिमाचल में तीन बड़ी ट्रक यूनियनों ने माल भाड़े की दरें कम की हैं। हिमाचल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज पांवटा इकाई और सिरमौर ट्रक ऑपरेटर यूनियन पांवटा ने बैठक कर मालभाड़ा 1.44 रुपये प्रति टन प्रति किमी कम करने का निर्णय लिया है। नई दरें 31 अक्तूबर से लागू हैं। वहीं हिमाचल के परिवहन मंत्री जीएस बाली कहते हैं कि किराया घटाने के लिए डीजल की कीमतें और कम होने का इंतजार कर रहे हैं।
लखनऊ गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार छाबड़ा ने बताया, "कंपनियों का माल भाड़ा एक अप्रैल से कम होगा। ट्रांसपोर्ट एवं कंपनियों के बीच अनुबंध है कि एक साल में डीजल का रेट घटे या बढ़े लेकिन किराया न बढ़ेगा और न घटेगा। डीजल सस्ता होने से ट्रांसपोर्टरों को काफी राहत मिली है।"
चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान केके अबरोल के मुताबिक, "‘एसोसिएशन की ओर से सभी ट्रांसपोर्ट संचालकों को डीजल की कीमतों में आई कमी को देखते हुए मालभाड़े में 10 फीसदी कमी करने के लिए पत्र लिखे गए हैं।"