वोट के चक्कर में गांव इस तरह बंट गए कि जनाजे भी उठने मुश्किल हो गए। बहेड़ी के पास सरकस गांव में मंगलवार को एक बुजुर्ग का शव 20 घंटे से ज्यादा वक्त तक घर में इसलिए पड़ा रहा कि गांव वाले न तो जनाजा उठाने को तैयार थे न ही कब्रिस्तान में जगह देने के लिए।
नमाज-ए-जनाजे के लिए भी कोई तैयार न हुआ। वजह थी कि इन शख्स ने प्रधानी चुनाव में गैर मुस्लिम को वोट डाला था। इस बहिष्कार के लिए हारे पूर्व प्रधान ने बाकायदा गांव में पंचायत भी की। बात थाने तक पहुंची तो पुलिस ने गांव जाकर लोगों को समझाया। जनाजे के नमाज के लिए इमाम बहेड़ी से बुलाया गया और मंगलवार दोपहर बाद दफीना हो पाया।
रिटायर्ड कांस्टेबिल मुशर्रफ अली खां ने पूरी उम्र जी। सौ साल से ऊपर निकल गए थे। गांव में अब लोग हिंदू मुसलमान हो गए लेकिन मुशर्रफ पुराने आदमी थे और पुराने रिश्तों की कद्र करते थे। प्रधानी के चुनाव में उन्होंने महेश चंद्र गुप्ता को वोट दिया और वह मुख्तार अंसारी को हरा कर प्रधान बन गए।
सोमवार शाम छह बजे मुशर्रफ खां का इंतकाल हो गया था। परिवार वाले उन्हें गांव के कब्रिस्तान में दफन करने की तैयारी कर रहे थे। मुशर्रफ के नाती अरशद का कहना है कि इसी बीच हारे प्रत्याशी मुख्तार के समर्थक पूर्व प्रधान अयूब खां ने गांव में पंचायत कर उसके दादा को गैर मुस्लिम को वोट देने पर गांव की कब्रिस्तान में दफनाने पर रोक लगवा दी।