भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ का पवित्र धमेख स्तूप आस्था के कंकड़ों से घायल हो रहा है। स्तूप पर खाता चढ़ाने की परंपरा है। कुछ स्थानीय धंधेबाज इसकी आड़ में न सिर्फ सैलानियों से रकम ऐंठ रहे हैं बल्कि स्तूप के अस्तित्व को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सैलानियों को झांसा दिया जाता है कि खाता स्तूप पर जितना ऊपर तक जाएगा और जितना देर तक स्तूप पर रुका रहेगा उतना ही पुण्य मिलेगा। इसके लिए खाता में कंकड़ बांध कर फेंका जाता है। इसकी एवज में सैलानियों से मोटी रकम वसूली जाती है। पहले से ही क्षरण रोग का शिकार इस स्तूप के लिए एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
दुनिया भर में ख्यात धमेख स्तूप के दर्शन-पूजन के लिए विभिन्न देशों से बौद्ध अनुयायी और इतिहास प्रेमी सारनाथ पहुंचते हैं। इस समय पर्यटन का पीक सीजन होने के नाते बड़ी संख्या में सैलानी सारनाथ पहुंच रहे हैं। बौद्ध मतावलंबी स्तूप पर खाता (दुपट्टे जैसा विशेष, पवित्र कपड़ा) चढ़ाते हैं। लेकिन, धंधेबाजों ने यहां भी अपनी कमाई की राह ढूंढ ली है।