वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाली केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो (सीईआईबी) की एक टीम ने करीब 2,280 करोड़ रुपए के काले धन को सफेद बनाने के मामलों का खुलासा किया है।
सीईआईबी वित्त मंत्रालय की एक नोडल एजेंसी है जो वित्तीय अपराध से जुड़ी खुफिया जानकारियां इकट्ठा कर संबंधित विभाग को भेजती है। उसने प्राइवेट प्लेसमेंट प्रोग्राम (पीपीपी) के जरिए काले धन को सफेद बनाने से जुड़ी जानकारियां संबंधित विभागों को दी है।
दरअसल, पीपीपी मॉडल काले धन को सफेद बनाने का एक नया तरीका है। इसमें सूचीबद्ध कंपनियों की ओर से जारी आईपीओ के उलट लोगों या समूह को प्रतिभूति ऑफर किए जाते हैं।
खुफिया जानकारी पर कार्रवाई करते हुए आयकर महानिदेशालय (खुफिया और अपराध जांच) ने सीईआईबी को तीन रिपोर्ट भेजी थीं। इन रिपोर्टों के मुताबिक 2280 करोड़ रुपए की आय का कोई लेखा-जोखा नहीं पाया गया था।
विदेशी विनिमय कानून के उल्लंघन की जांच के लिए इन रिपोर्टों को प्रवर्तन निदेशालय को भी भेजा गया। सीईआईबी आयकर महानिदेशालय की कुछ अन्य जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के बारे में सूचनाएं इकट्ठा कर उसका विश्लेषण और उसे संबंधित विभाग को भेजने वाली वित्तीय खुफिया यूनिट ने 881 संदिग्ध लेन-देन का पता लगाया, जिसमें पीपीपी मॉडल के जरिए काले धन को सफेद बनाने की कोशिश की गई।
आगे की कार्रवाई के लिए इन संदिग्ध लेनदेन की जांच की जा रही है। इसमें 10 लाख रुपए से अधिक के लेनदेन की जांच की जाती है।
काले धन को सफेद बनाने के लिए पीपीपी मॉडल के दुरुपयोग को रोकने के लिए सीबीडीटी और ईडी जांच में अन्य एजेंसियों को सहयोग कर रही हैं।
वित्तीय खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों का मानना है कि पीपीपी मॉडल के जरिए काले धन को सफेद बनाने में संगठित गिरोह सक्रिय हैं।