दिल्ली में चलती बस में हुए गैंगरेप का जहां चारों ओर एक सुर में विरोध किया जा रहा है, वहीं मध्यप्रदेश के खरगोन जिला मुख्यालय पर एक महिला कृषि वैज्ञानिक ने इस संबंध में अजीबोगरीब बयान देकर नए विवाद को जन्म दे दिया है।
डा. अनीता शुक्ला ने बुधवार को यहां पुलिस प्रशासन की ओर से आयोजित एक सेमिनार में सामूहिक बलात्कार मामले में पीड़ित युवती को ही दोषी ठहरा दिया। पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुए सेमिनार में डा. शुक्ला ने कहा कि छह लोगों से घिरने के बाद युवती यदि विरोध नहीं जताती तो शायद उसकी आंतें निकालने की नौबत नहीं आती।
स्थानीय कृषि अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिक के पद पर पदस्थ डॉ. शुक्ला ने कहा कि देर रात उस युवती को अपने बॉयफ्रेंड के साथ घूमने की क्या आवश्यकता थी। यदि कोई लड़की ऐसा करती है तो इस तरह की घटनाओं को रोकना संभव नहीं है। उन्होंने पुलिस के रवैये का पक्ष लेते हुए कहा कि दरअसल महिलाओं ने उन्हें मिले अधिकारों और सुविधाओं का गलत उपयोग प्रारंभ कर दिया है।
इसी वजह से इस तरह की घटनाएं प्रकाश में आती हैं। मीडिया में मामले के आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पुलिस ने इस सेमिनार का आयोजन अवश्य किया, लेकिन यह अनीता के निजी विचार हैं। राज्य के पुलिस महानिदेशक नंदन दुबे ने कहा कि इस तरह के बयानों को वह उचित नहीं मानते हैं, लेकिन फिलहाल महिला वैज्ञानिक के खिलाफ कोई कार्रवाई करने का इरादा नहीं है।