दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जब कमान संभाली, तो उम्मीद थी कि तमाम वादे अब हकीकत में बदल जाएंगे। बिजली और पानी के बिलों के मोर्चे पर कुछ राहत मिली भी।
लेकिन ऐसा नहीं कि जो उन्होंने जो किया, वह कर दिखाया। कुछ वादे ऐसे हैं, जो अब तक पूरे नहीं हुए। नए मुख्यमंत्री उन पर यू-टर्न मार चुके हैं।
सरकार और प्रशासन संभालने के बाद उसकी व्यावहारिक मजबूरियों की वजह से केजरीवाल को समझ आ रहा होगा कि सब कुछ इतना आसान नहीं है, जितना दूर से दिखता है। आइए गौर करें ऐसे 6 मामलों पर, जिन्हें लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पलटी मार गई।
जनता दरबार, नहीं लगेगा इस बार
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जनता दरबार लगाकर समस्या सुनने और उनका समाधान निकालने को लेकर का खूब प्रचार किया। पिछले हफ्ते शनिवार को अपना वादा भी निभाया।
इस दिन दिल्ली सचिवालय के बाहर दिल्ली सरकार ने जनता दरबार लगाया। लेकिन भीड़ इतनी पहुंच गई कि सारा खेल बिगड़ गया। केजरीवाल वहां से चले गए, लौटे तो आश्वासन दिया कि अच्छी व्यवस्था के साथ फिर लगाएंगे दरबार। लेकिन सोमवार को बयान आया कि अब जनता दरबार नहीं लगाएंगे।
केजरीवाल ने कहा कि नया मेकेनिज्म तैयार किया गया है, जिसके तहत शिकायतों के लिए ऑनलाइन, कॉल सेंटर और चिट्ठी से जानकारी देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जनता से हफ्ते में एक बार मुलाकात करेंगे, लेकिन शिकायतें नहीं लेंगे।
भ्रष्टाचार की जांच, कब होगी सरकार?
दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले और प्रचार के दौरान अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने सबसे बड़ा मुद्दा बनाया भ्रष्टाचार को। प्रचार में सबसे ज्यादा यह बात उठाई गई कि सत्ता में आने पर वह सभी के भ्रष्टाचार की जांच करेंगे।
केजरीवाल और उनकी पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रमंडल खेल घोटाला, ट्रांसपोर्ट घोटाला जैसे मामलों पर कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया। शुरुआत छोटी मछलियों से की गई है। लेकिन पुराने मामलों की जांच को लेकर अभी तक कुछ नहीं किया गया।
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी अंदरखाने से अरविंदर सिंह लवली और शीला दीक्षित की पार्टी से साठगांठ कर चुकी है, इसलिए कोई कदम नहीं उठा रही।
आधे बिजली बिल की हकीकत यह
आम आदमी पार्टी ने बिजली के भारी बिलों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। आंदोलन को हवा देने के लिए केजरीवाल ने कानून अपने हाथों में लिया और कई घरों में जाकर मीटर के तार तक काट दिए।
अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि पचास फीसदी बिजली बिजली दरें कम किए जाएंगे, लेकिन दिल्ली सरकार ने इस बारे में जो फैसला किया, वह केवल 400 यूनिट तक की सीमा से जुड़ा है।
इससे काफी छोटे तबके को फायदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा यह राहत देने के लिए सब्सिडी का सहारा लिया जा रहा है और इस बारे में पहले कुछ नहीं बताया गया था।
नौकरी पक्की करेंगे, लेकिन कब होगी?
आम आदमी पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में दावा किया गया था कि अगर वह दिल्ली की सरकार संभालती है, तो स्थाई स्वभाव वाले कामकाज में लगे कर्मचारियों को स्थाई कर दिया जाएगा।
लेकिन अब तक इस दिशा में कोई बड़ा ऐलान नहीं किया गया है। शनिवार को लगे जनता दरबार में भी बड़ी संख्या में जो लोग पहुंचे, वो ऐसे थे जो कई साल से कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पक्का करने के वादे के अलावा अब तक कुछ नहीं मिला।
अब केजरीवाल का बयान आया है कि अस्थाई अनुबंधित कर्मियों को स्थायी करने की कोशिश करेंगे। क्योंकि इसमें बहुत सी कानूनी पेचीदगियां हैं, इसलिए इसे देख रहे हैं।
बिल माफ करेंगे, फिर पलटी
अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि आंदोलन के कारण जिन्होंने बिल जमा नहीं कराया, उनका बिल माफ करेंगे। अगर बिजली चोरी का मुकदमा बना है, तो वापस लेंगे।
हाल में इस बात का ऐलान भी कर दिया गया। लेकिन इस पर काफी ऐतराज जताया गया। यह तक कहा गया कि अगर ऐसा किया गया, तो उन लोगों के साथ विश्वासघात होगा, जिन्होंने ईमानदारी से तय वक्त पर बिल जमा कराए हैं।
हालांकि, इस मामले को लेकर भी केजरीवाल ने यू-टर्न ले लिया है। हाल में उनका नया बयान आया है, जिसमें कहा गया है कि इसे लेकर चर्चा जारी है और मामले को मिल बैठकर निपटाया जाएगा।
हवा से चलने वाले मीटरों का क्या हुआ?
दिल्लीवासियों की शिकायत रही है कि वे इतना पानी इस्तेमाल नहीं करते, जितना बिल उन्हें चुकाना पड़ता है। ऐसा इस वजह से होता है कि उनके पानी के मीटर ठीक नहीं हैं।
अरविंद केजरीवाल जब चुनाव प्रचार कर रहे थे, तो खुद अपने हाथों में यही मीटर लेकर दिखाया करते थे कि किस कदर हवा के दबाव से भी यह मीटर चला करते हैं। लेकिन अब दिल्ली में यही मीटर लोगों के घरों में लगाया जा रहा है।
हालांकि, केजरीवाल ने जल बोर्ड अधिकारियों से कहा है कि जिन पानी के मीटर के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने प्रदर्शन किया था, उसकी जांच कराई जाए। केजरीवाल ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी उपभोक्ता को मीटर लगाने की जबरदस्ती न करें। किसी उपभोक्ता की मर्जी है, तभी मीटर लगाएं। लेकिन हकीकत कुछ और है।
कांग्रेस ने किया AAP पर हमला
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने प्रदेश सरकार को कॉल सेंटर और हेल्पलाइन सरकार करार दिया है। कांग्रेस के विधायक हसन अहमद और पूर्व विधायक मुकेश शर्मा ने कहा कि आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली सरकार के इन फैसलों से आम आदमी की भावना को ठेस पहुंचती है।
मुख्यमंत्री केजरीवाल की अगुवाई में जनता ने चुनकर जिस पार्टी को भेजा, वह काम करने की बजाय रोजाना नए हेल्पलाइन नंबर जारी कर रही है। जनता दरबार का नाटक किया जिसमें कांट्रैक्ट कर्मी आए, लेकिन उनका समाधान नहीं हुआ।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से दोनों नेताओं के हवाले से जो बयान जारी किया गया उसमें कहा है कि केजरीवाल को आम आदमी का प्रतिनिधि कहलाने का हक नहीं है।