पूर्वी दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों का एक अनोखा कारनामा सामने आया है।
वह वृद्धावस्था पेंशन करने के दौरान मांगे जाने वाले दस्तावेजों में 60 वर्ष से अधिक आयु की विधवाओं एवं तलाकशुदा महिलाओं से भविष्य में शादी नहीं करने के वायदे के तौर पर शपथ पत्र मांगा जा रहा है।
इस तरह का शपथ पत्र न देने पर अधिकारी पेंशन करने की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा रहे।
पूर्वी दिल्ली नगर निगम की स्थाई समिति की बैठक में भाजपा पार्षद ऊषा शास्त्री ने 60 वर्ष से अधिक आयु की विधवाओं एवं तलाकशुदा महिलाओं से भविष्य में शादी नहीं करने के वायदे के तौर पर शपथ पत्र मांगने के मामले का खुलासा किया।
उन्होंने कहा कि अधिकारी वास्तविक स्थिति का आकलन किए बिना नियम एवं शर्ते तय कर रहे है।
उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि क्या उनके समाने कभी 60 वर्ष से अधिक आयु की महिला की शादी होने का मामला सामने आया है। उनके तर्कों का अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं मिला।
विपक्ष की नेता वरियाम कौर ने भी अधिकारियों के रवैये का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इस तरह की शर्तें तय करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
इसी बीच समिति अध्यक्ष संजय सुरजन ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए पेंशन करने के लिए मांगे जा रहे दस्तावेजों में से शादी संबंधी शपथ पत्र को हटाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि नगर निगम लोगों की आर्थिक मदद करने के लिए पेंशन देती है। इसके लिए लोगों की इज्जत से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं है।
इससे पहले समिति की बैठक में भाजपा पार्षद महक सिंह ने कूड़ा डालने के लिए डस्टबीन खरीदने की योजना में अनेक खामिया निकालकर अधिकारियों की कार्य शैली पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के डस्टबीन रखने की योजना रद्द हो गई और अब स्टील के डस्टबीन खरीदे जा रहे है।
जबकि अधिकारियों ने प्लास्टिक के डस्टबीन की योजना में आई खामियों को दूर नहीं किया। उनकी आपत्ति का भी अधिकारियों के पास उत्तर नहीं मिला।