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हाउस टैक्स दो वरना घर के बाहर बजेगा ढोल

Fri, 30 Nov 2012 01:01 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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यह शादी के न्यौते का कार्ड नहीं है, हाउस टैक्स नहीं देने को नोटिस है। आपके इलाके के व्यक्ति हाउस टैक्स नहीं दे रहे हैं। उनकी ओर कई-कई लाख रुपये हाउस टैक्स बकाया है। टैक्स नहीं दिया तो इसी तरह ढोल बजेगा। ढोल की थाप के बीच यह आवाज दक्षिणी दिल्ली के नेहरू प्लेस, कालकाजी, महिपालपुर और द्वारका की सड़कों पर पूरा दिन सुनाई दी।
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दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने हाउस टैक्स नहीं देने वाले लोगों पर शिकंजा कसना आरंभ किया है। उसने टैक्स नहीं देने वाले लोगों से निपटने का ऐसा रास्ता निकालना है कि नगर निगम के इतिहास में उस बारे में कभी किसी ने सोचा भी नहीं था। उसके इस कदम से हाउस टैक्स वालों की नींद उड़ गई है। क्योंकि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने टैक्स न देने वालों से वसूली करने के लिए उनके घर एवं दुकानों के सामने ढोल बजाना आरंभ कर दिया है।

दक्षिण दिल्ली की अनेक सड़कों पर बृहस्पतिवार को शादी और विरोध प्रदर्शन जैसा माहौल था। दो लोग ढोल बजाते हुए चल रहे थे और उनके पीछे कुछ लोग नारे लगा रहे है। उन्होंने अपने हाथों में विभिन्न स्लोग्न लिखी तख्तियां भी ले रखी थी। खास बात यह है कि वह न तो शादी की रस्म निभा रहे थे और न ही किसी राजनीतिक दल के नेता एवं कार्यकर्ता थे। ढोल और नारेबाजी सुनकर दुकानों एवं घरों से बाहर निकले इलाके के लोग यह दृश्य देखकर हैरान थे।
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दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के हाउस टैक्स विभाग ने बृहस्पतिवार को महिपालपुर में 56, नेहरू प्लेस में 11, कालकाजी में दो और द्वारका में एक सपत्ति के सामने ढोल बजाया। इतना ही नहीं, कर्मचारियों ने टैक्स न देने वाले लोगों के परिसरों पर कुर्की के नोटिस चिपकाए। इसके अलावा वे टैक्स देने वाले लोगों के नाम लिखी तख्तियां लेकर नारेबाजी की।

हाउस टैक्स विभाग ने यह कार्रवाई स्थायी समिति में लिए गए फैसले के अनुपालन में की। समिति में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया था कि हाउस टैक्स के बकाएदारों की सम्पत्तियों के बाहर ढोल बजाकर उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जाएगा ताकि वे अपना हाउस टैक्स का भुगतान करें।

विभाग के प्रमुख बी. एन. सिंह ने बताया कि हाउस टैक्स की वसूली में आई कमी और करदाताओं की घटती संख्या को देखते हुए यह फैसला लिया। उन्होंने बताया कि वर्षों पहले ऐसे ही बकाए करों की वसूली की जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह तरीका बंद हो गया। अब मजबूरन पुनः यह पारम्परिक तरीका अपनाना पड़ रहा है।
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