दिल्ली हाईकोर्ट ने बीआरटी कॉरिडोर रद्द नहीं करने का फैसला सुनाया है । अदालत ने कहा कि प्राइवेट वाहनों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बलि नहीं दी जाएगी। इस फैसले से दिल्ली की शीला सरकार को बड़ी राहत मिली है। राजधानी दिल्ली में सात नए बस रैपिड ट्रांजिट (बीआरटी) के निर्माण को सरकार ने सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दी है। करीब 105 किलोमीटर लंबे इन सातों कॉरिडोर पीडब्ल्यूडी बनाएगी।
मालूम हो कि एक गैर सरकारी संस्था 'न्याय भूमि' ने हाईकोर्ट में बीआरटी कॉरिडोर में बसों के लिए आरक्षित लेन को नॉन-पीक आवर में कारों के लिए इस्तेमाल करने देने के लिए याचिका दायर की थी। गैर सरकारी संस्था के अनुसार कई बार बस लेन खाली होती है जबकि दूसरी लेन में ट्रैफिक जाम लगा होता है। ऐसे में बस लेन का कार चालकों के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत दी जानी चाहिए।
संस्था ने सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बीआरटी को असफल और जनता के पैसे का बर्बादी बताया था। दिल्ली सरकार ने इसका विरोध किया था। एक अन्य गैर सरकारी संस्था ने भी इस याचिका का विरोध किया था। उनका कहना है कि कार चलाने वालों को सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करना चाहिए।