दिल्ली में दरिंदगी का शिकार हुई पांच वर्षीय बच्ची मुनिया को शुक्रवार को एम्स से छुट्टी मिल गई। वहीं, मुरादाबाद में दरिंदगी की शिकार हुई 12 वर्ष की मासूम गुड़िया ने 38 घंटे बाद अस्पताल में दम तोड़ दिया।
उधर, पंजाब के पठानकोट में 25 वर्षीय युवक की हैवानियत का शिकार हुई पांच वर्षीय मासूम बच्ची सिविल अस्पताल में जीने के लिए संघर्ष कर रही है।
मुनिया को एम्स से मिली छुट्टी
दिल्ली में दरिंदगी का शिकार हुईबच्ची को शुक्रवार करीब पौने बारह बजे से अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की दखल के बाद उसको यंग वूमन क्रिश्चियन एसोसिएशन (वाईडब्ल्यूसीए) में रखा गया है।
वहां बच्ची के साथ सिर्फ उसकी मां ही रह सकती है। बच्ची के चाचा ने बताया कि उसकी हालत अभी भी पूरी तरह से ठीक नहीं है। दुबारा से स्वास्थ्य जांच के लिए सोमवार को एम्स बुलाया गया है।
बच्ची के साथ हैवानियत की हदें पार
मुरादाबाद/चंदौसी। दरिंदे से अपनी जान बचाने के लिए 12 साल की उस मूक बधिर मासूम ने खूब संघर्ष किया। लेकिन आरोपी ने उसे बुरी तरह पीटा था। शरीर पर चोटों के निशान उस संघर्ष को बयां कर रहे हैं। प्राइवेट पार्ट में गहरी चोट थी। इसी से उसकी मौत हुई।
वारदात के बाद घर पहुंची बेटी को मां ने खून से लथपथ देखा तो चीख पड़ी। बेटी अपनी मां को गांव से बाहर उस स्थान तक ले गई, जहां वारदात हुई थी। मूक बधिर होने से वह किसी का नाम, पता नहीं बता सकी।
पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर वीके गोयल के अनुसार बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर गहरी चोट थी। खून का रिसाव रोकने के लिए अस्पताल में पांच टांके लगाए गए थे।
सीने पर खरोचों के निशान मिले हैं। आंख के नीचे और चेहरे पर भी चोटें हैं। मौत पेशाब की थैली फटने, आंत की झिल्ली डैमेज होने और चोट आने से हुई। प्राइवेट पार्ट के अंदर ब्लड क्लाट भी मिला।
जिंदगी के लिए लड़ रही हवस की शिकार मासूम
पठानकोट। सुजानपुर में 25 वर्षीय युवक की हैवानियत का शिकार हुई पांच वर्षीय मासूम बच्ची पठानकोट के सिविल अस्पताल में जीने के लिए संघर्ष कर रही है। बच्ची के लिए 24 से 48 घंटे बेहद अहम है। उसे गंभीर इंफेक्शन है।