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दिल्ली सरकार ने वापस लिया 'टू फिंगर टेस्ट' सर्कुलर

Mon, 08 Jun 2015 03:13 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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दिल्ली सरकार ने बढते विवाद को देखते हुए अपनी सर्कुलर वापस ले लिया है जिसमें ये कहा गया था कि यदि रेप पीड़ित महिला की सहमति हो तो डॉक्टर टू फिंगर टेस्ट कर सकते हैं।
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सूत्रों के मुताबिक उन लोगों के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी जिन्होंने इस सर्कुलर पर अपनी सहमति जताते हुए इसे जारी किया था। ये सर्कुलर बीते 31 मई को आया था जिसमें कहा गया था कि इस टेस्ट का उपयोग कुछ ही स्थितियों में किया जा सकता है और ये किसी भी महिला की नैतिकता पर सवाल उठाने का हक नहीं देता।

सरकार के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक पीड़ित को काउंसलिंग के माध्यम से यह समझाया जाएगा कि आखिर यह जांच जरुरी क्यों हैं? इस टेस्ट का सामाजिक कार्यकर्ता विरोध करते रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट कर चुका है तीखी टिप्पणी

इस टेस्ट के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में कहा था कि 'टू फिंगर टेस्ट महिला को उतनी ही पीड़ा पहुंचाता है जितना कि रेप'। कोर्ट ने यह भी कहा था कि 'इस तरह के टेस्ट सामाजिक पीड़ा भी देते हैं। सरकार को इस टेस्ट को खत्म कर के कोई दूसरा तरीका अपना होगा'।

दिल्ली सरकार द्वारा जारी किए गए 14 पेज के सर्कुलर के मुताबिक डॉक्टर इस टेस्ट पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए बाध्य नहीं हैं। सर्कुलर के मुताबिक इस टेस्ट को पूरी तरह बैन करना पीड़िता के स्वास्थ्य के साथ अन्याय करना होगा।

इस टेस्ट को Per Vaginal examination (PV )अथवा पी.वी. कहा जाता है। इस टेस्ट का विरोध कई गैर सरकारी संगठन भी कर चुके हैं। उनका कहना है कि कई सरकारी अस्पताल अभी भी इस प्रक्रिया को अपनाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार टू फिंगर टेस्ट में रेप पीड़ित महिला के जननांगों में डॉक्टर दो उंगलियां डालकर यह जांच करने की कोशिश करते हैं कि कोई अंदरूनी चोट अथवा जख्म तो नहीं हैं। जननांगो से सैम्पल लेकर उनकी स्लाइड बना कर उन्हें जांच के लिए भेजा जाता है। इस टेस्ट में जननांगो के लचीलेपन की भी जांच की जाती है।
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