दिल्ली सरकार ने बढते विवाद को देखते हुए अपनी सर्कुलर वापस ले लिया है जिसमें ये कहा गया था कि यदि रेप पीड़ित महिला की सहमति हो तो डॉक्टर टू फिंगर टेस्ट कर सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक उन लोगों के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी जिन्होंने इस सर्कुलर पर अपनी सहमति जताते हुए इसे जारी किया था। ये सर्कुलर बीते 31 मई को आया था जिसमें कहा गया था कि इस टेस्ट का उपयोग कुछ ही स्थितियों में किया जा सकता है और ये किसी भी महिला की नैतिकता पर सवाल उठाने का हक नहीं देता।
सरकार के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक पीड़ित को काउंसलिंग के माध्यम से यह समझाया जाएगा कि आखिर यह जांच जरुरी क्यों हैं? इस टेस्ट का सामाजिक कार्यकर्ता विरोध करते रहे हैं।