दिल्ली गैंगरेप मामले में चार दोषियों को फांसी की सजा मिलने के बाद बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि यह फैसला दबाव में लिया गया और वह हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
बचाव पक्ष के वकील ए पी सिंह ने साकेत कोर्ट के बाहर मौजूद मीडियाकर्मियों से कहा, "यह फैसला सरकार के इशारे पर किया गया। ऐसा राजनीतिक दबाव की वजह हुआ।"
सिंह ने कहा, "सबूतों को नजरअंदाज करते हुए सभी को फांसी दी गई है। इससे पहले भी कई रेप हुए, हत्या के मामले सामने आए, लेकिन उनमें फांसी नहीं हुई।"
'रेप न हुआ, तो मानेंगे फैसला सही'
वकील ने कहा, "दबाव के चलते 10 तारीख के बाद कोर्ट का जजमेंट बदला गया। हम फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट जाएंगे। ऐसा कहा जा रहा था कि फांसी की सजा होने पर यह मामला नजीर बनेगा। अगर अगले दो महीने में कोई रेप न हुआ, तो यह सही माना जाएगा, वरना नहीं।"
सिंह ने कहा, "अगर फांसी की सजा देने से बलात्कार रुक जाता है, तो हम ऊपरी अदालत नहीं जाएंगे। मेरे मुवक्किलों का कहना है कि सबूत ठोस है और आप हाई कोर्ट जाएं।"
अभियोजन पक्ष फैसले से संतुष्ट
दूसरी ओर अभियोजन पक्ष बेहद खुश है। सरकारी वकील ने कहा, "हम इस फैसले से बेहद खुश और संतुष्ट महसूस कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "जो दोषी ऐसा जघन्य अपराध करता है, फांसी मिले या उम्रकैद, उसे क्या फर्क पड़ता है, वे सभी फैसला सुनने के बाद चुप थे। फैसले से लड़की के माता-पिता और देशवासी, सभी खुश हैं। इस फैसले में सभी लोगों का योगदान छिपा है।"
सरकारी वकील ने कहा, "बचाव पक्ष के वकील का आरोप गलत है। न्यायपालिका पर दबाव नहीं होता। पर्याप्त सबूत थे। फास्ट ट्रैक अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पांच जजमेंट को आधार बनाते हुए फैसला सुनाया।"