दिल्ली में चलती बस में दरिंदगी का शिकार हुई युवती के शोक संतप्त पिता ने कहा है कि उनकी बिटिया पर हुए जघन्य हमले ने भारतीय समाज को सोते से जगाया है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि महिलाओं पर होने वाले हमलों पर आंखें बंद न रखें।
मृतक युवती के पिता ने कहा कि उन्हें पता था कि उनकी बिटिया बुरी हालत में है लेकिन उन्हें सिंगापुर इलाज के लिए ले जाने तक उम्मीद थी कि वह ठीक हो जाएगी। 16 दिसंबर को छह दरिंदों की हैवानियत का शिकार हुई 23 वर्षीय युवती ने सिंगापुर के अस्पताल में 29 दिसंबर को अंतिम सांस ली थी। 16 दिसंबर को युवती को अत्यधिक गंभीर हालत में सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
ब्रिटिश आईटीवीवन चैनल ने युवती के पिता के हवाले से कहा कि जब हम सिंगापुर गए थे तब बिटिया होश में नहीं थी लेकिन उसकी आंखों में आंसू थे। तब मुझे महसूस हुआ कि वह बुरी स्थिति में है। उस वक्त मैं सोच ही नहीं पा रहा था कि क्या करूं।
मैं बिना पंखों के पक्षी की तरह था। ऐसे में जब मैं सोचता वह सही हो सकती है तो कुछ आशा पाल लेता था। लेकिन जब मुझे पता चलता कि वह सही नहीं हो सकती है और उसके ऑपरेशन किए जाएंगे तो मुझे असहज महसूस होता था।
उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए बहुत ही मुश्किल भरा था लेकिन जब उसे वेंटिलेटर पर रखा जाता था तो मुझे कुछ उम्मीद नजर आती थी कि वह ठीक हो जाएगी। मैं सोचता था कि वह सही हो जाएगी और वह जीवित रहेगी।
पीड़िता के पिता ने कहा कि खौफनाक हमले के 13 दिन बाद उनकी बिटिया की मौत हुई लेकिन बिटिया पर हुए हमले ने भारतीय समाज में जागरूकता ला दी। उन्होंने देशवासियों से महिलाओं पर होने वाले अपराध और हमलों पर आंखें बंद नहीं रखने की अपील की है।
डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी के नाम पर किसी अस्पताल या नए कानून का नाम होते देखना चाहते हैं। चैनल ने पीड़िता के पिता की तस्वीर और उनके नाम का प्रकाशन किया है। साथ ही उसने पीड़िता के नाम का भी खुलासा किया।