वसंत विहार गैंगरेप मामले में दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने का फैसला कई मायनों में ऐतिहासिक है।
जहां साकेत की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पहली बार किसी मामले में फांसी सजा सुनाई, वहीं यह जज योगेश खन्ना के कार्यकाल में उनके द्वारा सुनाई गई पहली फांसी की सजा है।
साकेत जिला अदालत द्वारा भी किसी मामले में सुनाई गई यह फांसी की शायद पहली सजा है।
सरकार ने 16 दिसंबर की वारदात के बाद दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन का आदेश दिया गया था। राजधानी की जिला अदालतों में जनवरी में पांच विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई गई थीं।
साकेत स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट में सबसे पहले वसंत विहार गैंगरेप मामले की सुनवाई शुरू हुई। इसका प्रभार अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना को सौंपा गया और रूम नंबर 304 में शुरू हो गई फास्ट ट्रैक कोर्ट।
साकेत स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट में अब तक 23 मामलों की सुनवाई हुई है। इनमें से 20 में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया जबकि केवल तीन मामलों में आरोपियों को सजा सुनाई गई, जिनमें अक्षय ठाकुर, मुकेश, पवन गुप्ता व विनय शर्मा को मिली फांसी की सजा भी शामिल है।
मामले में सजा सुनाए जाने के बाद साकेत जिला अदालत का नाम इतिहास के पन्नों में जुड़ गया है। साकेत कोर्ट ने 28 अगस्त 2010 से काम करना शुरू किया था। स्थापना के तीन साल में सबसे अहम मामले में कोर्ट ने शुक्रवार को चार दरिंदों को फांसी की सजा सुनाई।