चलती बस में हुए गैंगरेप के अपराध में शामिल नाबालिग को अन्य आरोपियों की तरह सजा दिलाने की मांग वाली एक और याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में किशोर न्याय अधिनियम को चुनौती दी गई है।
जस्टिस केएस राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कमल कुमार पांडेय व अधिवक्ता सुकुमार की याचिका पर सरकार व मंत्रालयों से जवाब तलब किया। पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि 16 दिसंबर के गैंगरेप में शामिल किशोर ने बर्बर कृत्य किया है। ऐसे अपराध में किशोर न्याय अधिनियम (जेजे एक्ट) के प्रावधानों का लाभ उसे नहीं दिया जाना चाहिए। यह किशोर कुछ ही महीनों में वयस्क हो जाएगा। ऐसे में समाज को पूरी तरह से न्याय नहीं मिल पाएगा।
अधिवक्ता ने कहा कि अधिनियम के प्रावधानों में बदलाव जरूरी है ताकि बर्बर अपराध में शामिल किशोर को उसका लाभ न मिले। पीठ ने इस मामले को उन अन्य याचिकाओं से संबद्ध कर दिया है जो हाल ही में जेजे एक्ट के खिलाफ दायर हुई हैं। मालूम हो कि इस मसले पर पहले दायर कई याचिकाओं पर अदालत सरकार से जवाब तलब कर चुकी है।