प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को स्वीकार किया कि दिल्ली गैंगरेप की घटना ने सरकार को तत्काल कानूनों में बदलाव को मजबूर किया।
उन्होंने यह भी माना कि महिलाओं को सुरक्षित बनाने के लिए ‘अभी और प्रयास’ किए जाने जरूरी हैं। वह यहां विज्ञान भवन में मुख्यमंत्रियों और मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि दिल्ली गैंगरेप की घटना ने कानून और न्याय प्रक्रिया को ‘तत्काल आत्मावलोकन’ के लिए बाध्य किया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि न्याय प्रक्रिया में होने वाले कुछ विलंब से हमें हताश होकर प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने मौजूदा आबादी के हिसाब से न्यायाधीशों की संख्या बहुत कम होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने माना कि देश भर में तीन करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित हैं।
इसका प्रमुख कारण प्रति दस लाख की आबादी पर औसतन मात्र 15.50 न्यायाधीशों का होना है। इसलिए उन्होंने अदालतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्यों को आवश्यक धनराशि देने का आश्वासन भी दिया।
उन्होंने महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधों को निबटाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने पर न्यायपालिका को धन्यवाद दिया।
साथ ही बुजुर्गों और बच्चों के खिलाफ अपराधों से संबंधित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए भी ऐसी अदालतें बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की दिशा में मुख्यमंत्रियों को पहल करनी चाहिए। विभिन्न अदालतों में लंबित तीन करोड़ से अधिक मामलों में से 26 प्रतिशत तो ऐसे हैं जो पांच साल से ज्यादा पुराने हैं।
आम लोगों के लिए तार्किक हों कानून
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें सुनिश्चित करना होगा कि जिन कानूनों का आम नागरिकों को आए दिन सामना करना पड़ता है वे तय, स्थिर और तार्किक हों।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को न्याय देना व्यवस्था की जिम्मेदारी है। कानून को मानवाधिकारों का भी सम्मान करना चाहिए और साथ ही ध्यान रखना चाहिए कि मानवाधिकारों का कोई दुरुपयोग न करे।