जिंदल समूह से सौ करोड़ रुपये की उगाही के प्रयास के मामले में जी समूह के संपादकों सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया को अदालत ने सशर्त जमानत दे दी है। दोनों संपादक पिछले 20 दिन से जेल में बंद थे। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजरानी मिश्रा ने सोमवार को कहा कि आरोपी जमानत के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि जांच अभी आरंभिक चरण में है और दोनों 20 दिन से जेल में हैं। किसी विचाराधीन कैदी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखने से संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होगा।
अदालत ने दोनों संपादकों के बिना इजाजत विदेश जाने पर रोक लगाई है। इससे पूर्व बचाव पक्ष के वकील ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया गया है। उन्हें होटल में स्वयं शिकायतकर्ता के अधिकारियों ने बुलाया था। प्राथमिकी दर्ज होने के एक माह बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया, जबकि वे जांच में सहयोग कर रहे थे। बचाव पक्ष ने कहा कि यह न्यायिक व्यवस्था का सरासर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि दोनों पंद्रह साल से पत्रकारिता में हैं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इस आधार पर उन्हें जमानत दी जाए।
दूसरी ओर सरकारी वकील ने जमानत पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अभियुक्तों पर गंभीर आरोप हैं। ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग से स्पष्ट है कि दोनों ने सौ करोड़ रुपये मांगे थे। इस राशि को वैध बनाने के लिए इसे विज्ञापन का रूप दिया गया। इसलिए ऐसे लोगों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।