दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने सोमवार को दिल्ली लोकपाल बिल, 2014 को मंजूरी दे दी।
विधानसभा में पास करने से पहले बिल को केंद्र सरकार के पास अनुमति के लिए नहीं भेजा जाएगा। सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र 13 से 16 फरवरी के बीच बुलाने की सिफारिश उपराज्यपाल को भेजी है।
सरकार ने साफ किया है कि बिल को केंद्र सरकार के पास भेजे बगैर ही पास कराया जाएगा। संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप के मुताबिक सरकार का यह कदम असंवैधानिक है।
लोकपाल बिल पास होने पर केजरीवाल ने ट्वीट किया, 'बधाई! दिल्ली कैबिनेट द्वारा जनलोकपाल बिल पास।'
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इतना ही नहीं, उपराज्यपाल को भी भेजे बिना ही केजरीवाल विधानसभा में बिल पास कराना चाहते हैं। इसे लेकर विधानसभा कार्य संचालन और संविधान के जानकार कानून का रूप दिए जाने पर आशंका व्यक्त कर रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली लोकपाल बिल 16 फरवरी को आईजीआई स्टेडियम में पास कराने की घोषणा की है। स्टेडियम में सरकार ने आम जनता को भी बुलाया है।
हालांकि सरकार का साथ दे रही कांग्रेस और भाजपा इसे असंवैधानिक बता चुकी हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस के विधायक सदन की कार्यवाही में आएंगे या नहीं, यह अभी साफ नहीं है।
'भ्रष्टाचार खत्म करने में मिलेगी मदद'
चुनाव में आम आदमी पार्टी का दिल्ली लोकपाल कानून सबसे बड़ा मुद्दा था।
मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि इस कानून के बनने से न सिर्फ सार्वजनिक जीवन से भ्रष्टाचार खत्म करने में मदद मिलेगी, बल्कि पारदर्शिता और ईमानदारी भी सुनिश्चित होगी।
मनीष ने बताया है कि उत्तराखंड का लोकायुक्त बिल ही दिल्ली लोकपाल बिल का आधार है। फर्क इतना है कि वहां के बिल में मुख्यमंत्री और मंत्री के खिलाफ शिकायत बेंच में ही की जा सकती है, लेकिन दिल्ली के बिल में किसी के लिए कोई विशेष प्रक्रिया नहीं है।
सरकार ने दिन रात काम करके बिल को मूर्त रूप देने वाले अधिकारियों को धन्यवाद दिया है।
गौरतलब है कि कानून विभाग, विजिलेंस और सेवा विभाग ने तमाम आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उनको दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने बिल को मंजूरी दी है।