इस्लामिक इदारों में राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर तिरंगा फहराने को लेकर सबसे बड़े दीनी इदारे दारुल उलूम ने दो टूक कहा कि देश की आजादी में देवबंद के उलेमा ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था, इसलिए उलेमा-ए-देवबंद आजादी के दिन को गर्व के साथ मनाते हैं।
विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने शुक्रवार को कहा कि मुल्क को आजादी दिलाने में उलेमा-ए-देवबंद की अहम योगदान रहा है।
इसलिए वह इस दिन को गर्व के साथ मनाते हैं। दारुल उलूम के प्रवक्ता एवं संस्था के तंजीम-ओ-तरक्की विभाग के उपप्रभारी अशरफ उस्मानी ने कहा कि उलेमा-ए-देवबंद ने इस देश को आजाद कराने में बहुत बड़ा योगदान दिया। इसलिए हम इस दिन से अलग कैसे रह सकते हैं।
मुल्क की हिफाजत की करते हैं दुआ
उस्मानी ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस ही नहीं बल्कि हर रोज हम मुल्क की हिफाजत और खुशहाली के लिए दुआ करते हैं।
उलेमा-ए-देवबंद आजादी का जश्न नहीं मनाते इस बात को उस्मानी ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद दारुल उलूम का बैनर है।
जो देश के कोने कोने में शान के साथ तिरंगा फहराता हैं और इसमें देवबंदी उलेमा शरीक होते हैं। इतना ही नहीं मुल्क के अधिकांश मदरसों में भी गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर कार्यक्रम आयोजित होते हैं और तिरंगा फहराया जाता है।
सबसे तिरंगा फहराने की अपील
बरेली में दरगाह-ए-आला हजरत के उलमा ने आजादी के पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाने और झंडा फहराने की भी अपील की है। शहर काजी मौलाना असजद रजा खां ने कहा है कि स्वतंत्रता दिवस राष्ट्रीय पर्व है, इसे मनाने के साथ-साथ जंग-ए-आजादी के दीवानों के बारे में युवा पीढ़ी को बताएं।
इस मौके पर मदरसों व घरों पर भी झंडा फहराकर अपनी खुशी का इजहार करें। जमात रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबउद्दीन रजवी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर खासतौर से जंग-ए-आजादी में बुजुर्गों ने जिस तरह कुर्बानी दी है, इसके बारे में युवाओं को जरूर बताया जाए।
उन्होंने यह भी कहा है कि देश के तमाम स्वतंत्रता सेनानियों के साथ आला हजरत के दादा साहब रजा अली खां का जिक्र भी उलमा जरूर करें, जिनका जंग-ए-आजादी में बड़ा योगदान रहा है।