चुनाव आयोग से हरी झंडी मिलने के बाद रक्षा मंत्रालय की ओर से अगले आर्मी चीफ के लिए लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सुहाग के नाम की सिफारिश होने की खबर हरियाणा के झज्जर जिले के गांव बिसाहन के लिए एक नई उमंग और खुशियों को अपने साथ लाई हैं।
टीवी पर खबर मिलने के बाद से गांव का माहौल अचानक से बदला-बदला सा लगने लगा हैं।
बेरी सबडिवीजन से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव बिसाहन की आबादी करीब 2500 की है। गांव के लिए फख्र की बात यह है कि लगभग हर परिवार से कोई न कोई किसी न किसी रूप से सेना से जुड़ा हुआ है।
फौजियों के नाम से जाना जाता है सुहाग का गांव
गांव बिसाहन में पिता रामफल व माता ईशरी की गोद से जन्मे दलबीर सुहाग चार भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उनके छोटे भाई धर्मबीर सिंह भी भारतीय थल सेना में ही कर्नल के पद पर तैनात हैं।
गौरतलब है कि साल की शुरुआत में ही दलबीर सुहाग ने थल सेना के डिप्टी चीफ का कार्यभार संभाला है। अब सुहाग के सेना प्रमुख बनने की सिफारिश हो गई है। जिस गांव से सुहाग का नाता हैं कि उसे फौजियों के नाम से भी जाना जाता है।
देखा जाए तो गांव बिसाहन में भारतीय थल सेना के प्रति एक अजीब ही जोश नजर आता है। गांव की पृष्ठभूमि से पलकर बड़े हुए करीब 42 आफिसर जो सेना में लेफ्टिनेंट से लेफ्टिनेंट कर्नल मेजर के पद भी पहुंच चुके हैं। जबकि काफी संख्या में सूबेदार, सिपाही के पद पर भी तैनात है।
परिवार में खुशी, बधाई देने वालों का तांता
दलबीर सुहाग के छोटे भाई कर्नल धर्मबीर सिंह का कहना है कि दलबीर के नाम की सिफारिश तो हो गई है और अब हम सभी इस लोग इस बात के इंतजार में हैं कि उनके नाम की औपचारिक घोषणा हो। इससे पूरा परिवार खुश है।
आर्मी चीफ के लिए दलबीर सिंह के नाम की सिफारिश होने के साथ ही उनके पैतृक घर में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ हैं।
हालांकि उनकी मां ईशरी देवी पिछले कई दिनों से अपने बेटे के साथ ही दिल्ली में रह रही हैं। जबकि पिता रामफल यहां गांव में हैं। लेकिन जिस प्रकार से लोगों का जोश दिख रहा हैं उससे बुजुर्ग रामफल के चेहरे की प्रसन्नता भी एक अलग रूप में देखी जा सकती हैं। गांव का बच्चा हो या बड़ा, महिला हो या पुरुष आज के दिन सभी की जुबान पर इस बात को खूब चरचा हैं।
नहीं भूले हैं गांव की मिट्टी
भले ही दलबीर सुहाग गांव से ज्यादातर समय दूर ही रहे हैं लेकिन उसके बावजूद उनकी जड़ें गांव में अभी तक बखूबी जमी हुई हैं।
न सिर्फ उनके छोटे भाई कर्नल धर्मबीर साल भर में कई बार गांव का दौरा करते हैं बल्कि सहपाठियों और परिजनों से मिलकर अपने गांव की मिट्टी की सुगंध लेना नहीं भूलते।
कर्नल धर्मबीर का कहना हैं कि मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है और मेहनत करने वाले को जीवन में सफलता अवश्य ही मिलती है।