नोबेल पुरस्कार विजेता चौदहवें दलाईलामा 82 वर्षीय तेंजिन ग्यात्सो मैकलोडगंज छोड़ सकते हैं। उन्हें बंगलूरू के मैसूर स्थित नमड्रोलिंग मोनेस्ट्री में बसाने की तैयारी है।
उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो दलाईलामा की बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य के मद्देनजर इस तरह का फैसला लिया जा सकता है क्योंकि मैकलोडगंज में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है।
सूत्रों का कहना है कि इसके लिए मैसूर के नमड्रोलिंग मोनेस्ट्री में दलाईलामा के प्रवास की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
सूत्र बताते हैं कि आपातकाल में मैकलोडगंज से एयर लिफ्टिंग की सुविधा न होने से निर्वासित तिब्बत सरकार और गृह मंत्रालय धर्मगुरु के स्वास्थ्य को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते। लेकिन अभी स्पष्ट नहीं है कि दलाईलामा स्वयं मैकलोडगंज से जाने के इच्छुक हैं या नहीं।
नब्बे के दशक में तिब्बतियों द्वारा स्थानीय युवक की हत्या के बाद दोनों समुदायों में उपजे तनाव से आजिज आकर दलाईलामा ने तिब्बतियों को सीमा में रहने की नसीहत देते हुए धर्मशाला छोड़ने का ऐलान किया था।
तब उनके स्थानीय घनिष्ठ मित्र पीएन शर्मा ने मैकलोडगंज में दलाईलामा टेंपल के बाहर हड़ताल कर उन्हें जाने से रोका था।
पर्यटन उद्योग होगा प्रभावित
धर्मगुरु दलाईलामा के स्प्रिचुअल टीचिंग्स के लिए देश-विदेश से हर साल हजारों लोग आते हैं। दो साल पहले राजनीतिक पद छोड़ने के बाद वह अब साल में पांच-छह महीने यह टीचिंग करते हैं।
हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेर जैसे वीवीआईपी भी इसमें हिस्सा लेने आते हैं। यदि दलाईलामा चले गए तो वीआईपी मूवमेंट घटकर 10 फीसदी रह जाएगी।
होटल और गेस्ट हाउस की बुकिंग गिरेगी और मैकलोडगंज की रंगत उड़ जाएगी। देशभर के बौद्धमठों से आने वाले लामा भी यहां नहीं आएंगे। निर्वासित सरकार का मुख्यालय बेशक यहां रहे, लेकिन उसके कारण पर्यटक यहां नहीं आते।
मैसूर स्थित नमड्रोलिंग मोनेस्ट्री में दलाई लामा के प्रवास को लेकर तैयारियां चल रही हैं। हालांकि धर्मगुरु यहां से जाएंगे या नहीं यह उन पर है।-सी.पालरासु, डीसी, कांगड़ा
मैसूर के नमड्रोलिंग मानेस्ट्री में तमाम सुविधाएं मौजूद हैं। लेकिन धर्मगुरु को स्थान बदलना है या नहीं यह दलाईलामा स्वयं तय करेंगे। लेकिन उनके खराब स्वास्थ्य की अटकलें बेबुनियाद हैं। वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।-तेंजिन टकला, निजी सचिव दलाईलामा