केंद्रीय सतर्कता आयोग ने राष्ट्रमंडल खेलों (सीडब्लूजी) से जुड़े कार्यों को पूरा करने के दौरान सरकारी और निजी कंपनियों द्वारा करीब 1000 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का पता लगाया है।
सतर्कता आयुक्त आर. श्रीकुमार ने सीवीसी ने सीडब्लूजी घोटाले की जांच के लिए एक टीम का गठन किया था। इस टीम में टैक्स और अन्य विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया था। 1000 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का पता इसी टीम ने लगाया है।
श्रीकुमार ने बताया कि सीडब्लूजी से जुड़े कार्यों में 37 विभागों ने 9000 वित्त पोषित परियोजनाओं पर 15,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया था। इस घोटाले के लेकर कई तरह की जांच की गई और हर जांच का अलग निष्कर्ष निकाला गया। सीवीसी की जांच में जो सबसे खास बात सामने आई वह यह थी कि राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े कार्यों को पूरा करने में लगी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर टैक्स की चोरी की है। इन टैक्सों में आय कर, सेवा कर और वैट आदि शामिल हैं।
सतर्कता आयुक्त ने बताया कि टैक्स एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने से इस टैक्स चोरी की बात सामने आई। उन्होंने कहा कि अब तक संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर करीब 100 करोड़ रुपये की टैक्स की वसूली की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि टैक्स चोरी करने वालों से वसूली का काम जारी है और इस बात की पूरी उम्मीद है कि लगभग 1000 करोड़ रुपये की वसूली कर ली जाएगी।
श्रीकुमार ने बताया कि सीवीसी सीडब्लूजी से जुड़े घोटाले के 53 मामलों की छानबीन कर रहा है। इन मामलों में विभिन्न सरकारी और निजी कंपनियां आरोपी हैं। इन मामलों में से 28 की जांच विभिन्न स्तर पर चल रही है, जबकि 13 मामले आगे की जांच के लिए सीबीआई के पास भेजे जा चुके हैं। अन्य 12 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दायर की जा चुकी है।