मद्रास हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि एक आदमी को सिर्फ इस कारण आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी नहीं करार दिया जा सकता क्योंकि उसने अपनी पत्नी की रंग के आधार पर आलोचना की है। इस शख्स ने पत्नी के श्याम वर्ण पर टिप्पणी की थी।
जस्टिस एम सत्यानारायणन ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ परमाशिवम की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि रंग के आधार पर पत्नी की आलोचना उत्पीड़न या यातना नहीं है और इसे यह नहीं कहा जा सकता कि पति ने अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाया है।
जज ने आरोपी को दोष मुक्त कर दिया। याचिकाकर्ता परमाशिवम की पत्नी सुधा 12 सितंबर 2001 को मृत पाई गई थी। तिरुनेलवेली की जिला और सत्र न्यायाधीश ने परमाशिवम को अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराते हुए सात साल कैद की सजा सुनाई थी।
उसे दहेज उत्पीड़न कानून के तहत भी तीन साल की सजा सुनाई गई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि बीवी को ‘काला रंग’ का कहना उसे आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं है। इसलिए आरोपी को इस आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।