केंद्र की सत्ता के सेमीफाइनल माने जा रहे विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार से कांग्रेस के साथ यूपीए गठबंधन में हाहाकार मच गया है।
इस हार के बाद अपने सांसद ही जहां पार्टी की फजीहत कराने पर तुल गए हैं, वहीं बदली राजनीतिक परिस्थितियों में सहयोगी दलों के सुर भी अचानक बदल गए हैं।
तेलंगाना राज्य का विरोध कर रहे आंध्र प्रदेश के छह कांग्रेसी सांसदों ने अपनी ही मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देकर सरकार और कांग्रेस की फजीहत करा दी है।
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वहीं, सरकार की सबसे बड़ी सहयोगी एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने हार पर सीधे कांग्रेस नेतृत्व पर यह कह कर हमला कर दिया कि जनता को कमजोर प्रशासक पसंद नहीं हैं।
सपा-बसपा ने भी भ्रष्टाचार और महंगाई के सवाल पर यूपीए सरकार को नसीहतों की डोज देने में देरी नहीं की है। विकट राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अपनों की ओर से ही अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने से हिले कांग्रेस के मैनेजर नाराज सांसदों को मनाने में जुट गए हैं। जबकि नाराज सांसद प्रस्ताव पेश करने के लिए जरूरी 50 सांसदों के समर्थन के जुगाड़ में लगे हैं।
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विधानसभा चुनाव में मिली बुरी हार के बाद कांग्रेस चौतरफा मुसीबतों से घिर गई है। खास बात यह है कि मुसीबतों का पहाड़ विपक्ष ने नहीं बल्कि पार्टी के अपनों और सहयोगियों ने ही खड़ा किया है। इसकी शुरुआत सोमवार को तेलंगाना गठन से नाराज आंध्र के पार्टी सांसदों ने लोकसभा में अपनी ही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देकर की।
टीडीपी के सांसद भी विरोध में
सांसद आर संबाशिव राव, सब्बम हरि, वी अरुण कुमार, ए साईप्रताप, एल राजगोपाल और जीवी हर्षकुमार ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को इस आशय का नोटिस देकर कांग्रेस नेतृत्व को सन्न कर दिया है। मुश्किल तब और बढ़ गई जब टीडीपी के चार सांसद भी इन नाराज सांसदों के साथ खड़े हो गए।
इन नाराज कांग्रेसी सांसदों की योजना छोटे राज्य का मुखर विरोध कर रही तृणमूल कांग्रेस और सपा को प्रस्ताव के पक्ष में राजी करने की है। हालांकि सरकार और कांग्रेस नेतृत्व को उम्मीद है कि अविश्वास प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी सांसदों का समर्थन तेलंगाना विरोधी उसके सांसदों को नहीं मिलेगा।
कांग्रेस के ‘कमजोर’ नेतृत्व पर पवार का हमला
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने कहा है कि कांग्रेस को विधानसभा चुनावों में गहरा झटका लगा है। कांग्रेस को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि लोग कमजोर नेता को पसंद नहीं करते हैं। शासक को सशक्त होना चाहिए, जो न सिर्फ प्रभावी कदम उठा सके, बल्कि फैसला लेने और उसे लागू कराने की भी क्षमता रखता हो।
उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में इंदिरा गांधी का उदाहरण दिया जा सकता है। इस हार में युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और उनका गुस्सा मतदान में जाहिर हुआ है। पवार ने नई राजनीतिक ताकत (आप) के उभरने के लिए कांग्रेस के मौजूदा कमजोर नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया।
बसपा और सपा ने भी दी नसीहत
तीखे हमले और नसीहतों की घुट्टी पिलाने के बावजूद मायावती ने यूपीए को समर्थन जारी रखने की बात कह कांग्रेस को मुसीबत की इस घड़ी में थोड़ी राहत जरूर दी है।
बसपा प्रमुख मायावती ने केंद्र को भ्रष्टाचार और महंगाई पर नियंत्रण की नसीहत देते हुए कहा कि पार्टी ने बार-बार सरकार को इस आशय की चेतावनी दी थी। सपा नेता रामगोपाल यादव ने भी कांग्रेस के खिलाफ लहर की बात कहते हुए इसके लिए महंगाई और भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया।