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दशकों से जारी है माननीयों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई

Sat, 03 Aug 2013 12:04 AM IST
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र
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देश की राजनीति में अपराधियों की बढ़ती पैठ पर नए सिरे से बहस छिड़ी है। कारण है संसद और विधानसभाओं में लगातार बढ़ते जा रहे आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रतिनिधियों की संख्या।
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सांसदों और विधायकों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों को निपटाने में हो रही देरी भी चौंकाने वाली है। देश के 40 सांसदों और विधायकों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, आगजनी, डकैती जैसे संगीन मामले बीते 12 से 29 सालों से अटके पड़े हैं।

इस मामले में भी देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश अव्वल है। इन 40 प्रतिनिधियों में इस सूबे की हिस्सेदारी 30 फीसदी है। जिन छह विधायकों पर हत्या का मुकदमा दर्ज है उनमें भी इसी सूबे से हैं।
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संसद और विधानसभाओं में जहां दिनों दिन बढ़ते जा रहे आपराधिक रिकॉर्ड के प्रतिनिधियों की संख्या हैरान करने वाली है, वहीं हैरानी इनसे संबंधित मुकदमों को निपटाने में हो रही देरी से भी है।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने उन 40 सांसदों और विधायकों की सूची जारी की है जिनके खिलाफ बेहद संगीन मामले की सुनवाई बीते 12 से 29 सालों से जारी है। सबसे अधिक समय से लटका मामला हत्या से जुड़ा है।

मध्य प्रदेश के उज्जैन के कांग्रेस सांसद गुड्डू प्रेमचंद के खिलाफ हत्या का मामला बीते 29 सालों से लंबित है।
अलीगंज के सपा विधायक रामेश्वर सिंह के खिलाफ हत्या के मामले में ही बीते 28 साल से सुनवाई जारी है, तो भाजपा सांसद हरिन पाठक के खिलाफ भी हत्या के मामले में ही बीते 24 सालों में सुनवाई पूरी नहीं हो पाई है।
इसी प्रकार माननीयों के खिलाफ हत्या के प्रयास, डकैती और आगजनी जैसे आधा दर्जन मामलों में बीते 20 सालों में सुनवाई पूरी नहीं हो पाई है।

एडीआर की इस सूची में 12 साल से कम समय से लटके मामलों को शामिल नहीं किया गया है। अगर ऐसा किया गया तो यह संख्या 1,460 तक पहुंच जाएगी।

उल्लेखनीय है कि इस समय आपराधिक मामलों का सामना कर रहे संसद में 202 और विधानसभाओं में 1,258 प्रतिनिधि हैं।

इनमें लोकसभा के 162, राज्यसभा के 40 और विधानसभाओं के 1,258 प्रतिनिधि शामिल हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि बीते दस सालों में राजनीतिक दलों ने 18 फीसदी दागियों को टिकट दिया।

यहां भी उत्तर प्रदेश आगे
संगीन अपराधों में शामिल जिन 40 प्रतिनिधियों के खिलाफ बीते 12 से 29 सालों तक सुनवाई जारी है, उनमें अकेले उत्तर प्रदेश के 10 विधायक और चार सांसद शामिल हैं।

दस विधायकों में से 4 (मित्रसेन, रामकरण आर्य, उपेंद्र और मुख्तार अंसारी) के खिलाफ हत्या के मामले सालों से लंबित हैं। रामेश्वर सिंह, स्वामी प्रसाद, अब्दुल मसूद, विजय कुमार, महबूब अली के खिलाफ हत्या का प्रयास, डाका सहित कई अन्य संगीन अपराधों पर सालों से फैसला नहीं हो पाया है।

ऐसे 15 सांसदों में तीन इस सूबे से हैं। इनमें बसपा सांसद राकेश पांडे के खिलाफ हत्या का मामला 11 साल से तो सपा सांसद राकेश सचान के खिलाफ अपहरण, हत्या का प्रयास का मामला 11 साल से और सपा के ही रामकिशुन के खिलाफ गंभीर रूप से घायल करने का मामला बीते 17 सालों से लंबित है।
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