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झूठा निकला सपा का दावा, यूपी में बढ़ रहे हैं अपराध

Mon, 03 Jun 2013 01:06 AM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
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समाजवादी पार्टी की सरकार में आपराधिक वारदातों में बढ़ोत्तरी के विरोधियों के आरोप भले ही जबानी हों। लेकिन वास्तविकता से इतर नहीं हैं, क्योंकि मौजूदा सरकार के बीते एक वर्ष के कार्यकाल में राज्य में हुए अपराध के आंकड़े इस सच्चाई से पर्दा हटाते हैं।
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राज्य में गत वर्ष से इस साल के मार्च माह तक 4645 हत्याएं, 1821 बलात्कार, 215 डकैती और 35,351 चोरी के मामले दर्ज हुए हैं। इस एक वर्ष की तुलना तत्कालीन मायावती सरकार के पांच में से किसी भी वर्ष से नहीं की जा सकती।

राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में सपा के एक साल के कार्यकाल में और तत्कालीन सरकार के पांच वर्षों में हुए अपराध के आंकड़ों ब्यौरा दिया है।
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इसके मुताबिक बसपा की तुलना में सपा सरकार में आपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं। तत्कालीन बसपा के कार्यकाल के दौरान पांच साल (15/05/2007 से 15/03/2012) में 16462 हत्याएं, 7369 बलात्कार, 777 डकैती और 126328 चोरी के मामले पंजीकृत हुए थे।

यानी पिछली सरकार में हरेक साल में करीब 3293 हत्याएं, 1474 बलात्कार, 156 डकैती और 25265 चोरियों के मामले दर्ज हुए।

वहीं सपा के पहले साल के कार्यकाल में हत्या, बलात्कार, डकैती और चोरी समेत अन्य आपराधिक वारदातों का आंकड़ा कहीं ज्यादा है। हालांकि प्रदेश में किसी को यह शिकायत जरूर नहीं है कि पुलिस उसके मामले को दर्ज करने में टाल-मटोल कर रही है। जबकि पिछली सरकार पर ऐसे आरोप लगते रहे थे।

याद रहे कि अभिलेख ब्यूरो ने हाथरस निवासी अधिवक्ता गौरव अग्रवाल की आरटीआई के जवाब में अपराध के आंकड़ों का ब्यौरा दिया है।

कांग्रेस, भाजपा और बसपा उत्तर प्रदेश में सपा के आने के बाद से अपराध में बढ़ोत्तरी के लिए एक सुर में लगातार अखिलेश सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जबकि इसके इतर सपा का कहना है कि उनकी सरकार में आपराधिक मामलों को दर्ज न कराने का निर्देश नहीं दिया जाता।

किसी भी शिकायत को पुलिस की ओर से टाला नहीं जाता, जैसा पिछली सरकारों में होता रहा है। सपा के इस पलटवार का हालांकि अभी तक किसी भी राजनीतिक दल ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। लेकिन अभिलेख ब्यूरो के आंकड़े राज्य में अपराध के बढ़ने की कहानी बयां करते हैं, जिन्हें झुठलाया नहीं जा सकता।
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