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विश्व प्रसिद्ध चौखंडी स्तूप की दीवार में दरार, अधिकारियों में हड़कंप

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अंतरराष्ट्रीय महत्व के चौखंडी स्तूप की दीवार में दरार आ गई है। शुक्रवार को इसकी जानकारी मिलते ही भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे। मुआयने का सिलसिला पूरे दिन चला।
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उच्चाधिकारियों के निर्देश पर शाम को संरक्षण कार्य शुरू करा दिया गया। अपनी विशिष्ट संरचना के लिए दुनिया भर में ख्यात इस गुप्तकालीन बौद्ध स्तूप से देश-दुनिया के करोड़ों बौद्ध अनुयायियों की आस्था जुड़ी है। इसकी दीवार में दरार आने से बौद्ध अनुयायियों और इतिहास प्रेमियों में चिंता की लहर दौड़ गई है।

करीब 93 फीट ऊंचाई वाले चौखंडी स्तूप की पूरी संरचना ईंट निर्मित है। 835 ई. और फिर 1904-05 ई. में कराए गए पुरातात्विक उत्खनन में यह पूरी संरचना सामने आई।  देश-दुनिया से हर साल बड़ी तादाद में बौद्ध अनुयायी स्तूप की परिक्रमा के लिए सारनाथ पहुंचते हैं। दर्शन-पूजन करते हैं।
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इस स्तूप के पिछले हिस्से की दीवार (पश्चिम की ओर) में दरार आ गई है। शुक्रवार को इसकी जानकारी एएसआई की सारनाथ सर्किल के अधिकारियों को हुई। आशंका है कि पिछले दिनों हुई बारिश के दौरान मिट्टी के गारे से बनी दीवार में पानी घुसने से यह दरार आई।
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एएसआई के अफसरों ने शुरू कराया संरक्षण कार्य

हालांकि अभी एएसआई के विशेषज्ञ इसकी पड़ताल में जुटे हैं, साथ ही मरम्मत कार्य भी शुरू करा दिया गया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो स्तूप के अगले हिस्से की दीवार को पहले ही संरक्षित करा दिया गया है लेकिन पीछे की दीवार का संरक्षण कार्य अभी नहीं कराया गया था। यदि इसे संरक्षित कर दिया गया होता तो यह समस्या नहीं आती। सारनाथ में चल रहे पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण कार्य की गति धीमी होने से भी दिक्कतें आ रही हैं।

चौखंडी स्तूप के अधीक्षण पुरातत्वविद् अजय श्रीवास्तव ने बताया कि विभाग चौखंडी स्तूप की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह गंभीर है। इसकी दीवार के कुछ हिस्सों में दरार की सूचना मिलते ही उनके संरक्षण का कार्य शुरू करा दिया गया है।

चौखंडी स्तूप
चार भुजाओं वाले आधार पर बनी यह गुप्तकालीन ईंट निर्मित विशाल संरचना वस्तुत: बौद्ध स्तूप है। लगभग चौथी-पांचवीं शती में बना यह स्तूप संभवत: उस स्थान विशेष का द्योतक है, जहां बोधि प्राप्ति के पश्चात भगवान बुद्ध की भेंट सर्वप्रथम पंचवर्गीय भिक्षुओं से हुई थी।

इस स्तूप का उल्लेख सातवीं शताब्दी के विख्यात चीनी यात्री ह्वनेसांग ने अपने यात्रा विवरण में भी किया है। स्तूप के शिखर पर सुशोभित अष्ट पहल बुर्जी एक मुगल कालीन संरचना है, जिसके उत्तरी द्वार पर लगे एक अरबी शिलालेख के अनुसार इसका निर्माण हुमायूं के आगमन को अविस्मरणीय बनाने के लिए राजा टोडरमल के पुत्र गोवर्धन द्वारा 1588 ई. में कराया गया था।
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