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हर कोई चाहता है हाथ का साथ

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बिहार चुनावों को छोड़ पिछले डेढ़ सालों में लोकसभा समेत सभी विधानसभा चुनावों में मुंह की खा चुकी कांग्रेस के सितारे फिलहाल बुलंदी पर हैं। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दोनों ही राज्यों में सत्ता से बाहर बैठी पार्टियां कांग्रेस से गठबंधन के लिए लालायित हैं। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा से सहमी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन करने पर विचार कर रही है। सूबे में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होना है। डीएमके सुप्रीमो एम करूणानिधि ने भी कहा है कि तमिलनाडु में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों में वे कांग्रेस से गठबंधन कर सकते हैं। सोमवार को उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों में डीएमके से गठबंधन के लिए पार्टियों को न्योता दिया जाएगा, तो उनमें कांग्रेस भी शामिल होगी।

हालांकि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस आलाकमान सीपीएम के बजाय तृणमूल कांग्रेस से गठबंधन के फिराक में है, जबकि पार्टी की स्थानीय इकाई के नेता इसके विरोध में है। तमिलनाडु की कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष ईवेकेएस एलांगोवन ने कुछ दिनों पहले कहा कि था कि कांग्रेस राज्य में अकेले ही चुनाव लड़ेगी।
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यूपीए की पहली सरकार में सहयोगी थी माकपा

सोमवार को सीपीआईएम महासच‌िव सीताराम येचुरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के मसले पर जनवरी में चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि सीपीएम की पश्‍चिम बंगाल इकाई भी किसी भी प्रकार का फैसला केंद्रीय कमेटी की सहमति के बाद ही लेगी।

उल्लेखनीय है कि वाम मोर्चा पश्चिम बंगाल में 34 वर्ष तक सत्ता में रह चुका है। 2011 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने उसे बुरी तरह से हराया था। पिछले लोकसभा चुनावों में भी वाम मोर्चा बंगाल में बुरी तरह से हार गया था।

वाम मोर्चा ने 2004 में बनी यूपीए के पहली सरकार को बाहर से समर्थन भी दिया था, हालांकि 2008 में हुए भारत अमेरिका परमाणु समझौते के मसले पर उसने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष और सीपीएम के के वरिष्ठ नेता रहे सोमनाथ चटर्जी ने भी कहा है कि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ मुकाबला करने के लिए माकपा को कांग्रेस के साथ हाथ मिला लेना चाहिए।
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डीएमके भी कांग्रेस को साथ लेने के फिराक में

पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले तक डीएमके कांग्रेस की सहयोगी रही। यूपीए की पहली और दूसरी दोनों ही सरकारों में डीएमके शामिल थी। हालांकि डीएमके नेताओं कनिमोझी और ए  राजा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद दोनों ही दलों ने लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा। नतीजा ये रहा कि दोनों ही दल सभी स‌ीटों पर हर गए।

तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों में से 37 एआईएडीएमके ने जीती, जबकि दो सीटों पर एनडीए विजयी रही। तमिलानाडु में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन के मसले पर डीएमके सुप्रीमो एम करूणानीधि ने कहा कि डीएमके गठबंधन के रूप में जब पार्टियों को न्योता देगा, तब कांग्रेस को छोड़ा नहीं जाएगा।

कांग्रेस लोकसभा चुनावों के बाद हरियाणा और महाराष्ट्र की सत्ता गंवा चुकी है, जबकि दिल्‍ली विधानसभा चुनाव में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। झारखंड में भी पार्टी 6 सीट जीत पाई। बिहार में कांग्रेस ने जदयू और राजद से गठबंधन किया था, जिसके बदौलत 27 सीटें जीतने में कामयाब रही।
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