सुप्रीम कोर्ट आज कोल गेट स्टेटस रिपोर्ट में बदलाव से जुड़े सीबीआई के हलफनामे की जांच करेगा।
सीबीआई ने हलफनामे में कबूला था कि कानून मंत्री ने कोल गेट के स्टेटस रिपोर्ट में बदलाव करवाए थे। इसके बाद से विपक्षी दल लगातार कानून मंत्री अश्विनी कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
अगर सुप्रीम कोर्ट अश्विनी कुमार के खिलाफ कोई टिप्पणी करता है तो उनको अपनी कुर्सी बचाना मुश्किल होगा।
सोनिया, पीएम में मतभेद
रेल मंत्री पवन बंसल और कानून मंत्री अश्वनी कुमार को नहीं हटाने का फैसला भले ही पीएम मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की रजामंदी से हुआ हो, लेकिन दोनों को कैबिनेट में बनाए रखने पर मतभेद के सुर सुनाई पड़ने लगे हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कुछ शीर्ष मंत्री अनौपचारिक बातचीत में दोनों मंत्रियों को सरकार पर ‘बोझ’ मान रहे हैं। दोनों मंत्रियों को लेकर बन रही इस तरह की राय को इनकी कुर्सी पर मंडराते खतरे के और गहराने का संकेत माना जा रहा है। कांग्रेस हाईकमान पर भी दोनों मंत्रियों की विदाई का भारी दबाव बन गया है।
पार्टी नेता फिलहाल खुलकर इन दोनों मंत्रियों को बचाने की रणनीति पर कुछ कहने से परहेज कर रहे हैं, मगर दबी जबान में सवाल जरूर उठा रहे हैं।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री का कहना था कि सीबीआई के हलफनामे के बाद कोर्ट के रुख का इंतजार करने का कोई मतलब नहीं था।
पार्टी के एक नेता ने कहा कि दोनों मंत्रियों की वजह से संसद के अंदर और बाहर काफी फजीहत झेलनी पड़ रही है। भले ही पार्टी और सरकार जितनी भी दलीलें दें, मगर जनता सब समझती है। दोनों मंत्री उनकी पहली नजर में ही दोषी हैं।
एक केंद्रीय मंत्री ने तो यहां तक कहा कि दोनों मंत्रियों की कुर्सी बचना बेहद मुश्किल है। देर से ही सही पर इन्हें जाना पड़ेगा।
दरअसल, पार्टी और सरकार के ज्यादातर नुमाइंदों की औपचारिक बातों को देखे तो इस बात पर एक राय बनती दिख रही है कि दोनों मंत्रियों की वजह से सरकार की बहुत किरकिरी हो रही है और अब दोनों को बिना देर किए हटा दिया जाना चाहिए।
उधर, पवन बंसल के निजी सचिव का सीधा नाम आने से भी पार्टी के अंदर भौंहे तन गई हैं। इस घूस कांड की मनी ट्रेल कहीं न कहीं बसंल परिवार को लपेटे में ले रही है।
इन सब बातों के सार्वजनिक होने के बाद शीर्ष स्तर पर माना जा रहा है कि बंसल को खुद इस्तीफा देने के लिए कह देना चाहिए।