फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार को अदालत ने उन पर लगे दुष्कर्म के आरोपों को निरस्त करने का आदेश जारी किया। भंडारकर ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि इस मामले की जांच में समुचित प्रक्रिया का अनुसरण नहीं किया गया और कोर्ट में महज पीड़ित के बयान लिए गए।
जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष भंडारकर की ओर से पेश हुए अधिवक्ता शिवाजी.एम जाधव ने कहा, 'पुलिस की ओर से इस मामले को फर्जी बताया गया। इसके बावजूद निचली अदालत ने मेरे मुवक्किल के खिलाफ महज उस बयान के आधार पर मुकदमा चलाने को कहा, जो कथित पीड़ित की ओर से दिया गया था। अदालत से गुजारिश है कि इस मामले में उचित आदेश जारी कर राष्ट्रीय स्तर का अवार्ड पाने वाले सिने जगत के फिल्म निर्माता को राहत प्रदान करें।'
पीठ ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए भंडारकर के खिलाफ दुष्कर्म के आरोपों को निरस्त कर दिया। भंडारकर पर दुष्कर्म का आरोप स्ट्रग्लिंग मॉडल व अभिनेत्री प्रीति जैन ने लगाया था जिसमें उन्होंने कहा था कि निर्देशक ने आने वाली फिल्म में मुख्य भूमिका देने के बहाने उनके साथ दुष्कर्म किया।
प्रीति ने जुलाई, 2004 में मुंबई के वर्सोवा थाने में भंडारकर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि भंडारकर ने 1999 से 2004 के दौरान प्रीति के साथ 16 बार दुष्कर्म किया। प्रीति ने आरोप लगाया था कि भंडारकर ने उनसे शादी करने और फिल्मों में भूमिका देने का वादा किया था। लेकिन बाद में वह इससे मुकर गए।
मुंबई ट्रायल कोर्ट ने गत वर्ष इस मामले में भंडारकर को आपराधिक मुकदमे का सामना करने को कहा था। जबकि सितंबर, 2011 में पुलिस ने एक रिपोर्ट दाखिल कर कहा था कि भंडारकर पर लगाया गया आरोप झूठा है। लेकिन इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट को अस्वीकार करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्ट्या भंडारकर के खिलाफ मामला बनता है। भंडारकर ने निचली अदालत के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी दलील को खारिज कर दिया था।