सर्वोच्च अदालत ने अपने एक फैसले में कहा है कि संविधान सरकारों को पदोन्नति में एससी/एसटी श्रेणी के कर्मचारियों को आरक्षण देने की शक्ति देता है लेकिन अदालतें सरकारों को ऐसा प्रावधान बनाने का निर्देश नहीं दे सकती हैं।
हालांकि न्यायाधीश जे चेलमेश्वर और न्यायाधीश एके सिकरी की पीठ ने कहा कि यदि एससी/एसटी श्रेणी के कर्मचारियों को पदोन्नति से इनकार किया जाता है तो वे अदालत से न्याय की गुहार लगा सकते हैं।
पीठ ने कहा कि यदि राज्यों को लगता है कि एससी/एसटी श्रेणी या अन्य किसी अन्य श्रेणी या वर्ग के कर्मचारियों की उसके तहत आने वाली सेवाओं में उचित प्रतिनिधित्व नहीं है तो वह इनके लिए आरक्षण यहां तक कि पदोन्नति में भी कोटा तय कर सकता है।
इसका अधिकार सरकारों को संविधान से मिला हुआ है। इसको देखते हुए अदालतें ऐसे प्रावधान को बनाने के लिए राज्यों को निर्देश जारी नहीं कर सकती हैं। पीठ अनुच्छेद 16 के अनुबंध 4 और 4ए पर चर्चा कर रही है। इसमें विभिन्न सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण का मामला निहित है।
पीठ ने अपना फैसला सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया एससी/एसटी कर्मचारी कल्याण संगठन और अन्य द्वारा सभी श्रेणियों में पदोन्नति में आरक्षण देने से बैंक के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनाया। बैंक ने कहा था कि 5700 से अधिक बेसिक सैलरी वाले स्केल या पद वाले क्लास ए में पदोन्नति में आरक्षण संबंधी कोई नियम नहीं है।