सुप्रीम कोर्ट की ओर से 1993 और 2010 के बीच 218 कोयला खदानों के आवंटन को गैरकानूनी करार देना मोदी सरकार के लिए भारी परेशानी का सबब बन सकता है।
मौजूदा सरकार कोयला खदान आवंटन की नई प्रक्रिया तय करने में लगी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से इस मामले में अब उसके लिए फौरी कदम उठाना जरूरी हो जाएगा।
अगर सुप्रीम कोर्ट 1 सितंबर को इन कोयला खदानों का आवंटन रद्द करने का फैसला सुनाता है तो बिजली सेक्टर के लिए बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा और इसका सीधा असर स्टील, सीमेंट और दूसरे उद्योगों पर पड़ेगा।
जाहिर है पहले से ही सुस्त चल रही इकोनॉमी के लिए यह बेहद घातक होगा। अगर सुप्रीम कोर्ट ने कोयला खदानों का आवंटन रद्द कर दिया तो रिलायंस पावर, जिंदल स्टील एंड पावर, हिंडाल्को, भूषण स्टील, आईएसटी स्टील, जेएलडी यवतमाल एनर्जी जैसी कई कंपनियों को करारा झटका लगेगा।
कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने इस पूरे मामले में कहा कि सरकार फैसले का इंतजार कर रही है। सरकार इसे मंजूर करेगी और इसके असर से पैदा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाएगी।