प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते अक्तूबर में स्वच्छ भारत अभियान के तहत आह्वान किया था कि 2 अक्टूबर 2019 तक भारत को खुले में शौच से मुक्त किया जाए। लेकिन अभी जो जमीनी हालात हैं, उनमें लक्ष्य हासिल करने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य करने की ज़रूरत दिखाई पड़ती है।
साल 2012 तक भारत के 11 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण घरों में टॉयलेट की सुविधा नहीं थी। सरकार अभी तक केवल 1.1 करोड़ घरों में ही टॉयलेट बनाने में मदद कर पाई है। इसका मतलब है कि अगर मोदी सरकार अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहती है तो अगले चार सालों में उसे 9.9 करोड़ घरों में टॉयलेट बनवाने पड़ेंगे। यानी इसके लिए सरकार को बहुत विशाल फंड आवंटित करना पड़ेगा।