कॉरस्पांडेंस से बैचलर आफ लॉ (एलएलबी) और मास्टर आफ लॉ (एलएलएम) की पढ़ाई करने वालों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने कहा है कि दूरस्थ शिक्षा से कानून की डिग्री हासिल करने वाले लेक्चरर नहीं बन सकते। इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए बीसीआई ने बड़ा कदम उठाया है। अक्टूबर, 2012 में जारी आदेश में कहा गया है कि दूरस्थ शिक्षा की पढ़ाई गुणवत्तापरक नहीं है। उनके यहां अर्ह टीचर क्लास नहीं लेते हैं। रेग्यूलर पढ़ाई भी नहीं होती है। कुछ सेंटर खोलकर परीक्षा करा दी जाती है। फिर परिणाम आ जाते हैं। ऐसी डिग्री के सहारे लेक्चरर नहीं बना जा सकता।
बीएनडी कॉलेज में लॉ डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष और पूर्व डीन फैकल्टी ऑफ लॉ डॉ. एसएस तोमर ने बताया कि बीसीआई का यह आदेश देश के सभी लॉ कालेजों पर लागू होगा। शैक्षिक सत्र 2013-14 से देश के किसी भी लॉ कालेज में दूरस्थ शिक्षा के एलएलएम डिग्रीधारक नहीं पढ़ा सकेंगे।
नए आदेश से एलएलबी, एलएलएम की डिग्री हासिल करके निजी लॉ कालेजों में पढ़ाने वाले टीचर्स की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। अब उनका अनुमोदन आगे नहीं बढ़ाया जा सकेगा। इस सत्र के बाद टीचिंग का अनुमोदन अपने आप निरस्त हो जाएगा। ऐसा हुआ तो एलएलबी की पढ़ाई प्रभावित होगी। टीचिंग स्टाफ कम हो जाएगा और रेग्यूलर पढ़ाई नहीं कराई जा सकेगी।