अलकायदा, तालिबान, आईएस और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे लोग भटके हुए हैं। सही मायनों में तो इन्हें राह दिखाने की जरूरत है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को चाहिए कि वह पहले इन सब को हिंदू बनाएं, उसके बाद देश के मुसलमानों के बारे में सोचें। यह कहना है शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे सादिक का। रविवार को वह अलीगढ़ एक निजी कार्यक्रम में भाग लेने आए हुए थे। उन्होंने धर्मांतरण और घर वापसी कार्यक्रम को महज चंद लोगों का एक राजनीतिक स्टंट बताया।
मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि वर्ष 2021 में देश के सभी मुसलमान और ईसाई हिंदू बन जाएंगे। धर्म जागरण समिति के बृज क्षेत्र के प्रमुख राजेश्वर सिंह के इस बयान पर मौलाना कल्बे सादिक का कहना है कि अगर ऐसा हो भी गया तो क्या खतना वाला हिंदू स्वीकार होगा। उन्होंने बताया कि खतना मुसलमानों की एक पहचान होती है, मजहब बदलने वाले इस पहचान को कैसे बदलेंगे।
मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि जिस दिन देश की अवाम चंद सिरफिरे लोगों के बयान पर संजीदा होना बंद कर देगी उस दिन देश का सांप्रदायिक माहौल खुशनुमा हो जाएगा। मोहन भागवत के बयान पर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक ढोंग और तमाशे से ज्यादा कुछ नहीं है। पहले तो खुद भागवत को एक सच्चा हिंदू बनने की कोशिश करनी चाहिए। सच्चा हिंदू कभी भी कट्टरता की बातें नहीं करता है। हिंदू धर्म तो हमेशा से सर्वधर्म की बात करता आया है। स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती जैसे महान विद्वान भी इसी धर्म में हुए हैं। उन्होंने देश के मुसलमानों को पैगाम देते हुए कहा कि वह भावनाओं से नहीं समझदारी से काम लें।
मौलाना कल्बे सादिक का कहना है कि देश में सरकार बनती है उसकी तकदीर बदलने के लिए। लोगों के मजहब बदलने के लिए नहीं। अगर मुसलमानों को बदलना ही चाहते हैं तो उनकी गरीबी और अशिक्षा को बदलने की कोशिश करो मजहब को नहीं। मजहब बदलने से चंद लोग खुश हो सकते हैं, लेकिन देश को क्या हासिल होगा।
'हिंदू हैं तो सुरक्षित हैं अल्पसंख्यक'
धर्मांतरण कराने वाले देश के सारे हिंदू नहीं हैं। हिंदुत्व के नाम पर यह चंद लोगों की साजिश है। इस तरह के आयोजन से किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है। सच तो यह है कि हिंदू हैं तो अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं। आगरा-अलीगढ़ में जांच के दौरान तो यही बात सामने आई है। यह कहना है उप्र अल्पसंख्यक आयोग की टीम का। रविवार को भी टीम ने शहर में अलग-अलग लोगों से बातचीत की।
शनिवार की रात से अल्पसंख्यक आयोग की टीम ने शहर में डेरा डाला हुआ है। टीम के चार सदस्य अलग-अलग लोगों से बात कर रहे हैं। धर्मांतरण मामले पर अब तक हुई बयानबाजी और आयोजन की घोषणा जैसे कई विषयों पर जांच चल रही है।
रविवार को भी टीम के सदस्यों ने कई क्षेत्रों में जाकर हालात का जायजा लिया। टीम के सदस्य शफी आजमी ने बताया कि घर वापसी हो या धर्मांतरण यह कुछ ही लोगों का रचा हुआ खेल है। ऐसा नहीं है कि इससे देश का सारा हिंदू समाज जुड़ा हुआ है। उनका कहना था कि आगरा में जिनके साथ धोखा हुआ उन्हें हिंदुओं ने ही तसल्ली और सुरक्षा दी है। अगर ऐसा नहीं होता तो वह लोग कब के वहां से भगा दिए गए होते।
सबसे बड़ी बात तो यह कि वहां के सबसे बड़े मंदिर मनकामेश्वर के महंत योगेश पुरी जी खुद धोखे में कराए गए धर्मांतरण का खंडन कर रहे हैं। वह इसे गलत बता रहे हैं। अलीगढ़ में भी बातचीत के दौरान यह बात सामने आई है कि अभी भी दोनों धर्मों के लोगों में आपसी तालमेल बना हुआ है। दोनों को एक-दूसरे पर भरोसा है।
अल्पसंख्यक आयोग की टीम के ही सदस्य मुफ्ती जुल्फिकार अली ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार एक मिसाल थी। उस वक्त कभी लगा ही नहीं कि भाजपा की सरकार आ गई है। कोई दहशत नहीं थी। लेकिन इस सरकार ने तो आते ही अपने होने का एहसास करा दिया।
राष्ट्र विरोधी कृत्य है धर्मांतरण : आदित्यनाथ
सदर सांसद महंत आदित्यनाथ ने धर्मांतरण को राष्ट्र विरोधी कृत्य करार दिया। वहीं संघ प्रमुख के उस बयान से सहमति जताई जिसमें उन्होंने घर वापसी को जायज करार दिया है। कहा कि किसी काल खंड में यदि कोई लोभ लालच या दबाव में दूसरे धर्म में चला गया और वह अपने धर्म में लौट रहा है तो इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, जबकि प्रदेश सरकार उस पर रोक लगा रही है।
सदर सांसद ने धर्मांतरण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि, कोर्ट ने पांच बालिकाओं के जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगाकर प्रदेश सरकार को आईना दिखाया है। अच्छा होता प्रदेश सरकार इस मामले को गंभीरता से लेकर मध्यप्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और गुजरात की तर्ज पर धर्मांतरण की गतिविधियों पर रोक लगाती पर यह सरकार विपरीत कार्य कर रही है। यही वजह है कि हिंदू बालिकाओं का लगातार अपहरण और धर्म परिवर्तन किया जा रहा है।
आदित्यनाथ ने कहा कि यह अत्यंत चिंता का विषय है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभी तीन दिन पूर्व हिंदू बालिकाओं को मुस्लिम बनाने की घटना पर रोक लगाई है। जिन परिवारों की लड़कियों का अपहरण हुआ उनके परिजनों ने आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया पर अब तक एक भी अभियुक्त की गिरफ्तारी न होना पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न है।