भाजपा और जदयू के बीच उपजे विवाद को लेकर कांग्रेस की चुनावी ख्वाहिशें बढ़ रही हैं।
पार्टी की शीर्ष कमान को लगने लगा है कि एनडीए में जारी सिर फुटव्वल अगर आगे भी जारी रहा, तो उसका अगले लोकसभा चुनाव का मिशन कामयाब हो जाएगा।
दोनों पार्टियों के झगड़े से कांग्रेस दूरी तो बना ही रही है, लेकिन साथ ही वह नीतीश कुमार को फिलहाल तवज्जो भी देना नहीं चाहती।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि दोनों पार्टियों के झगड़े से जहां यूपीए सरकार पर जनता का भरोसा बढ़ेगा, वहीं पार्टी में यह संदेश भी जा रहा है कि सिर्फ कांग्रेस ही जनता को एक स्थायी सरकार दे सकती है।
मंगलवार को गोधरा कांड के मुद्दे पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सफाई दी है कि रेल मंत्री राज्यों की कानून व्यवस्था नहीं देखता।
उन्होंने कहा कि बतौर रेल मंत्री वह दुर्घटना के बाद गोधरा गए थे और इससे संबंधित रिपोर्ट खुद संसद को सौंपी थी।
दरअसल, नीतीश पर सवाल उठ रहा है कि वह भले ही अभी नरेंद्र मोदी की खुलकर मुखालफत कर रहे हैं। मगर 2002 में गोधरा कांड के दौरान वह रेल मंत्री थे और उन्होंने इसकी कड़ी निंदा नहीं की थी। मंगलवार को नीतीश की सफाई पर कांग्रेस ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है।
कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि यह बात सही है कि राज्य की कानून व्यवस्था मुख्यमंत्री की है। एनडीए में उस समय नीतीश शामिल थे। उन्होंने उस समय क्या कहा था। क्या नहीं कहा था। यह कोई मुद्दा नहीं है।
पार्टी इस सिलसिले में कोई टिप्पणी करना जरूरी नहीं समझती। दरअसल, पार्टी नीतीश से दूरी बना रही है। मगर उन पर सीधा हमला दागने से परहेज कर रही है।
पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि वह नीतीश पर यह सोचकर हमला नहीं कर रहे कि पार्टी उनसे भविष्य में हाथ मिलाने के दरवाजे बंद नहीं करना चाहती है बल्कि पार्टी दोनों पार्टियों के विवाद के बीच में पड़ना नहीं चाहती।
पार्टी का मानना है कि इस मामले में पक्षकार बनने के बजाय दूर से तमाशा देखना फायदे का सौदा है। इसलिए फिलहाल दोनों पार्टियों की कलह पर ज्यादा कुछ नहीं बोलने से परहेज किया जा रहा है।
शुरू में पार्टी के कुछ नेताओं ने चुटकी ली थी। मगर मंगलवार को पार्टी ने औपचारिक तौर पर इस मामले में बोलने से इंकार कर दिया।