पोंटी चड्ढा और उसके बिजनेस कमांडर सुखदेव सिंह नामधारी के बीच मतभेद की एक बड़ी वजह हार्ड कैश की वापसी नहीं होना भी बना था। पोंटी के ठिकानों पर आयकर छापों के दौरान मोटी रकम छुपाने में पोंटी ने नामधारी का भी यूज किया था। उधर, इस मामले में देहरादून स्थित ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने दिल्ली मुख्यालय से जांच की अनुमति मांगी है।
सूत्रों के अनुसार तीन महीने पहले जब पोंटी के नोएडा समेत कई शहरों में व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर छापे पड़े थे तो पोंटी ने अपने भरोसेमंद साथियों का इस्तेमाल नकद धनराशि संभालने में किया। इस दौरान एक बड़ी धनराशि नामधारी की निगरानी में रखी गई। तय हुआ कि माहौल ठीक होने पर यह राशि वापस होगी। सूत्रों का कहना है कि बाद में नामधारी पैसे वापस देने में आनाकानी करने लगा।
इधर, सूत्रों का दावा है कि पोंटी ने दक्षिण अफ्रीका में कई सौ एकड़ जमीन नामधारी के नाम पर ही खरीदी। इस मामले को लेकर दोनों के बीच मतभेद और गहरा गए। इसी तरह नोएडा में भी सौ एकड़ से ज्यादा जमीन खरीदी जानी थी। नामधारी इसमें भी लाभ चाहता था। मगर पिछली कुछ घटनाओं के चलते पोंटी इसके लिए तैयार नहीं था। कसरत तो रुद्रपुर मंडी समिति की बेशकीमती 50 एकड़ जमीन को लेकर भी हो रही थी। कुछ असरदार लोग लॉबिंग कर रहे थे कि यहां टर्मिनल बनाने के बजाय जमीन को पोंटी को मेगा शॉपिंग मॉल, होटल और बार के लिए दे दी जाए।
सिडकुल में बेनामी फैक्टरियां
चर्चा है कि सितारगंज सिडकुल में पोंटी की सात फैक्ट्रियां हैं। इनमें से कुछ नामधारी के रिश्तेदारों के नाम पर हैं। सितारगंज उप चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इनमें लजीज लंच का लुत्फ भी उठाया था।